एलओसी पर घुसपैठ के रास्तों की तलाश में छापेमारी
जहां किसी आतंकवादी की भौतिक उपस्थिति नहीं थी। पर कई वर्ष पहले यहां आतंकवाद चरम पर था तो आतंकवादी अलग-अलग रास्तों का उपयोग कर नियंत्रण रेखा से घुसपैठ करते थे। इसके बाद कश्मीर घाटी की ओर जाते थे। बाद में हालात में सुधार हुआ, पर अब करीब डेढ़ साल में दोनों जिलों में फिर से आतंकी गतिविधियां बढ़ गई हैं। अमरनाथ यात्रा को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है।
दो साल के दौरान आतंकी राजोरी-पुंछ में अधिक रहे सक्रिय
सूत्रों के अनुसार आतंकवादी घुसपैठ के बाद राजोरी और पुंछ क्षेत्रों में अधिक समय नहीं रुकते थे। वो कश्मीर घाटी का रुख करते थे, पर डेढ़ से दो साल के दौरान यह देखा गया है कि आतंकवादी राजोरी-पुंछ सीमावर्ती जिलों में अधिक समय बिता रहे हैं। डेढ़ से दो साल के दौरान देखा गया है कि आतंकवादी समूह इन जिलों में सक्रिय रहे हैं। एक भीतरी इलाके से दूसरे इलाके में जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर मुठभेड़ और सुरक्षाबलों द्वारा देखे गए पैरों के निशानों से स्पष्ट है कि आतंकी इन्ही दो जिलों के जंगलों में घूम रहे हैं।
5 महीने में 6 आतंकी घटनाएं
5 पैरा कमांडो शहीद, सात सिविलियन मारे गए... राजोरी जिले में 2023 के पहले 5 महीनों में 6 आतंकी घटनाओं में 7 सिविल लोग मारे गए हैं। 5 पैरा कमांडो शहीद हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों जिलों में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि को सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने गंभीरता से लिया है। क्योंकि, आतंकी संगठनों का लक्ष्य इन क्षेत्रों में आतंकवाद को पुनर्जीवित करना है।