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डीएम ने अभियोजन पक्ष, सीडब्ल्यूसी और ज्यूवीनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के कामकाज की समीक्षा की।

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राजोेरी। जिलाधिकारी राजेश कुमार शवन ने जिले में अधिक पारदर्शिता और प्रभावी आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई। इस दौरान अभियोजन पक्ष, सीडब्ल्यूसी और ज्यूवीनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के कामकाज की समीक्षा की। शुरुआत में मुख्य अभियोजन अधिकारी ने बैठक को कई मुद्दों जैसे कार्यालय भवन की कमी, सार्वजनिक अभियोजकों के लिए आवासीय क्वार्टर और अदालत परिसर के सुचारु कामकाज के मुद्दों से अवगत कराया। उन्होंने विंग को सौंपे गए कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की रूपरेखा दी।
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बैठक में जिला मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों से वन स्टॉप सेंटर, सीडब्ल्यूसी, जेजेबी सहित विभिन्न विभागों के केस-वार विवरणों के बारे में रिपोर्ट मांगी। जिन्होंने मामलों की संख्या और पीड़ितों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी दी। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि एक सरकारी वकील उस राज्य का प्रतिनिधित्व करता है जिसके नाम पर अभियोजन चलाया जाता है। विंग को यह सुनिश्चित करना होता है कि अपराधियों को दोषी ठहराया जाए और इस बीच यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई निर्दोष गलत कानूनी धाराओं में न फंसे।
उन्होंने कहा कि एक आपराधिक मुकदमे का उद्देश्य अपराध की जांच करना और अभियुक्त के अपराध या निर्दोषता का निर्धारण करना है और एक लोक अभियोजक को मामले की सच्चाई की खोज में अदालत की सहायता करना चाहिए। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि अंतर्विभागीय समन्वय और एक एकीकृत दृष्टिकोण न्याय के उचित कानून और वितरण के लिए आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को मामलों की सजा दरों में वृद्धि के लिए कठोर प्रयास करने के लिए पकहा।
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