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राजोरी जिले में एक शीशी से कोविड वैक्सीन 10 प्रतिशत होती है बर्बाद

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राजोरी। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में शीशी से कोविड वैक्सीन लगभग 10 प्रतिशत बर्बाद हो रही है। बर्बादी की वजह टीकाकरण के लिए दवाई की शीशी खुलने के चार घंटे में सारी दवा का इस्तेमाल न हो पाना है। शीशी खुलने के चार घंटे बाद बची हुई सारी खुराक इस्तेमाल के लायक नहीं रहती, जिसे बाद में नष्ट करना पड़ता है। महानिदेशक परिवार कल्याण ने राजोरी के डिप्टी सीएमओ को मामले की जांच करने और जरूरी उपाय करने के लिए कहा है।
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डिप्टी सीएमओ ने सोमवार को चिकित्सा अधीक्षक जीएमसी और सभी ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया है कि कोविड-19 वैक्सीन का बर्बादी प्रतिशत किसी भी सूरत में चार फीसदी से अधिक न हो। उन्होंने बीएमओ को निर्देश दिए कि वह कोविड-19 शीशी तभी खोलें जब टीकाकरण के लिए आठ या अधिक व्यक्ति मौजूद हों। कोविड-19 वैक्सीन के बर्बादी का मुख्य कारण यह है कि कर्मचारी शीशियों को तब खोलते हैं जब 3-4 लोग टीकाकरण के लिए आते हैं और ऐसे में वैक्सीन बर्बाद हो जाती है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि इस तरह के निर्देशों का पालन करना मुश्किल है, क्योंकि आठ से कम लोग कई बार वैक्सीनेशन के लिए पहुंचते हैं और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीकाकरण के लिए मजबूर करते हैं। डॉ. महमूद अहमद बीएमओ मंजाकोट ने बताया कि कोविड-19 वैक्सीन के प्रत्येक 5 मिलीलीटर शीशी में कुल 10 खुराक हैं।
दूरदराज इलाकों में सबसे ज्यादा मुश्किलें
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीकाकरण की वेस्टेज को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल है। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग पैदल चल कर लंबी दूरी तय करने के बाद वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचते हैं। उन्हें न तो टीकाकरण के लिए मना किया जा सकता है न ही टीकाकरण के लिए 8 से अधिक लोगों के उपस्थित होने तक इंतजार करने के लिए कहा जा सकता है। ऐसे में वैक्सीन को नष्ट करना ही विकल्प बचता है। दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए वरिष्ठ नागरिक वैसे भी कम संख्या में पहुंच रहे हैं।
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