राजोरी। तथ्यों को छिपाने, स्कूल शिक्षा निदेशालय के आदेशों का पालन न करने और अपने अधिकार क्षेत्र से बढ़ कर आदेश जारी करने पर मुख्य शिक्षा अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। स्कूल शिक्षा निदेशक अनुराधा गुप्ता ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
निदेशक ने सीईओ राजोरी गुलजार हुसैन की ओर से किए गए सभी अटैचमेंट, तैनाती के हालिया आदेशोें को भी रद्द कर दिया है। निदेशक के आदेश के अनुसार सीईओ को समय-समय पर सरकारी स्कूलों में शिक्षण स्टाफ के युक्तिकरण के प्रस्तावों को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा अन्य सरकारी विभागों के कार्यालयों में तैनात शिक्षण स्टाफ कोे वहां से डीटैच करने के पीछे के कारणोें की पूरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। लेकिन सीईओ ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। डीएसई के आदेश के अनुसार सीईओ द्वारा डिटेल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बजाय उन्होंने 12 मार्च को आदेश जारी किया और पिक एंड चूज आधार पर कुछ कर्मचारियों को डीटैच करने के आदेश जारी कर दिए। डीएसई के अनुसार सीईओ राजोरी ने जिन कर्मचारियों को डीटैच करने के आदेश दिए। उसमें प्रशासनिक विभाग और निदेशालय द्वारा तैनात किए गए शिक्षक भी शामिल है। इतना ही नहीं सीईओ ने उन को डीटैच करने का आदेश जारी कर उनका वेतन को भी रोक दिया। डीएसओ के अनुसार राजोरी जिले में सीईओ, जेडईओ ने सक्षम अधिकारियों के अनुमोदन के बिना ही अपने कार्यालयों और अन्य सरकारी कार्यालयोें में शिक्षण स्टाफ की तैनाती की है, जिससे कि स्कूलों मे बच्चों कि पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सीईओ को अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में जानकारी प्रदान करने मे देरी करते पाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप काम काज मे पारदर्शिता लाना संभव नहीं हो पाता है। डीएसई द्वारा जारी आदेश के अनुसार सीईओ राजोरी का आचरण, तथ्यों को छुपाने और प्रशासनिक एवं निदेशालय विभाग के आदेशों का पालन न करना और अपने अधिकार से बढ़ कर आदेश जारी करना गलत है। डायरेक्टर ने स्कूल शिक्षा के संयुक्त निदेशक शौकत महमूद को सीईओ राजोेरी के खिलाफ जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। जिससे की राजोरी जिले में अराजकता और भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके।