उन्होंने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जिस दिन राजोरी कबायलियों से मुक्त हुआ उसी दिन गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना भी की थी। उन्होंने गुरु गोविन्द सिंह की अमृत वाणी का जिक्र करते हुए बताया कि गुरु गोविंद सिंह ने भोले शंकर से यह वर मांगा था कि मैं नेक काम करने में सदा आगे रहूं।
युद्ध के मैदान में मौत से भी सामना हो जाय तो पीछे न हटूं और फतह करके वापस लौटूं। यही नहीं ज़ब अंतिम समय आए तो मैं युद्ध क्षेत्र में लड़ते हुए वीरगति प्राप्त करूं। गुरु गोविन्द सिंह की इस अमरवाणी ने निरंतर हमारे वीर सैनिकों का मार्गदर्शन किया है।
एलजी ने राजोरीवासियों और सैनिकों को आगाह करते हुए कहा कि दुश्मन की ओर से खतरा अभी भी बना हुआ है, ऐसे में नागरिकों को सदैव सतर्क रहना होगा। सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा, तभी दुश्मनों के नापाक मंसूबों का हम मुंहतोड़ जवाब दे पाएंगे। नागरिक, सेना के जवानों के हमसफर बनें। राजोरी के नागरिकों ने हर विपत्ति के समय ऐसा किया है। यह बलिदानियों की धरती है। यहां की महिलाएं भी वीारंगना हैं, बलिदान देने में पीछे नहीं रही हैं।
एलजी मनोज सिन्हा ने भारतीय सेना की बहादुरी और बलिदान की चिरस्थायी विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना के लिए हर दिन उसकी वीरता और देशभक्ति का प्रमाण होता है। राजोरी को पुनः प्राप्त करने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों और नागरिकों को श्रद्धांजलि देते हुए एलजी ने पाकिस्तानी सेना द्वारा छह महीने तक किए गए कब्जे को भारत के इतिहास में "काला युग करार दिया।
उन्होंने क्षेत्र में शांति और विकास के लिए प्रतिबद्धता दोहराई। सिन्हा ने कहा कि दुश्मन शांति भंग करने के लिए आतंकवादियों को सीमा पार से भेज रहा है। ऐसे समय में नागरिकों और सुरक्षा बलों को एकजुट और सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति प्रगति के लिए एक शर्त है।