शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने के मकसद से जिला शिक्षा विभाग द्वारा छेड़ी गई मुहिम के तहत सीईओ ने सरकारी मिडल स्कूल के हैड मास्टर सहित सभी शिक्षकों के वेतन पर रोक लगा दी है।
मामला मंजाकोट शिक्षा जोन के अंर्तगत पड़ने वाले सरकारी मिडल स्कूल सुक्का कस का है। कुछ दिन पहले सीईओ राजोरी द्वारा क्षेत्र के लोगों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल ककोड़ा, हैड मास्टर हाई स्कूल गंभीर ब्रहमना और जेडईपीओ मंजाकोट की अध्यक्षता में गठित एक विशेष टीम को स्कूल का दौरा कर जांच करने के निर्देश जारी किए थे।
टीम ने स्कूल का दौरा करने पर पाया कि स्कूल में 41 में से केवल 16 विद्यार्थी ही हाजिर हैं। स्कूल में टीम को न तो कोई टायम टेबल मिला और न ही स्कूल की कैश बुक व अन्य रिकार्ड पाया गया। इतना ही नहीं स्कूल में साफ सफाई भी नहीं थी और न ही मिड डेल मील का कोई रिकार्ड पाया गया।
विद्यार्थियों से पूछे गए सवालों का एक भी जवाब नहीं मिला। कुल मिला कर पढ़ाई शुन्य के बराबर देखी गई। टीम ने अपनी रिपोर्ट सीईओ को सोंपी। सीईओ राजोरी अल्ताफ हुसेन चौधरी ने इस प्रकार से लापरवाही बरतने का कड़ा नोटिस लेते हुए स्कूल के हैड मास्टर सहित सभी शिक्षकों के वेतन रोकने के निर्देश जारी करने के साथ हैड मास्टर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
सीईओ ने हैड मास्टर और अन्य सभी शिक्षकों के खिलाफ चार्जशीट दायर करने के भी निर्देश दिए और जेडईओ मंजाकोट को निर्देश दिए कि जब तक स्कूल में सारा रिकार्ड मेंटेन नहीं होता और विद्यार्थियों की पढ़ाई बेहतर नहीं होती किसी को भी वेतन न दिया जाए।