संगपुर के पांच बाढ़ पीड़ित परिवारों ने सेना के ऊपर उनके टेंट हटवाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।
सितंबर माह के पहले हफ्ते में बाढ़ और मूसलाधार बारिश के रूप में प्रकृति के प्रकोप के बाद अब बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन और सरकार की उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।
इतना ही नहीं बाढ़ पीड़ितों की हर संभव सहायता करने वाली सेना पर बाढ़ पीड़ितों ने उनको परेशान करने का आरोप लगाया है। शहर के संगपुर क्षेत्र के पांच बाढ़ पीड़ित परिवारों के करीब 41 सदस्य बाढ़ आने के बाद सड़क के किनारे टेंट लगाकर रह रहे हैं।
यहां अपने परिवार के साथ रह रहे सलामुद्दीन, मोहम्मद शरीफ और गुलशाह ने बताया कि शुक्रवार को बताया कि उनके साथ 10 छोटे-छोटे बच्चे और छह महिलाएं भी हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार आई भयंकर बाढ़ में उनके घर बह गए, जिसके बाद सेना और जिला प्रशासन ने उन्हें राहत सामग्री के नाम पर टेंट और कुछ खाने-पीने की सामग्री प्रदान की।
सेना ने क्षेत्र में सड़क के किनारे पांच पीड़ित परिवारों को टेंट लगाकर रहने की अनुमति भी दी थी, लेकिन अब सेना उस जगह को खाली करने के लिए कह रही है।
यहां तक कि वह अपने टेंट भी उनसे वापस मांग रही है। पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सेना ने उनसे टेंट वापस लेकर दरबदल करने की कोशिश की तो सभी परिवार सामूहिक आत्मदाह करेंगे।
उन्होंने इस मामले में जिला प्रशासन और राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने के लिए गुहार लगाई है। इस बारे जब सेना की 163 ब्रिगेड के कमांडर से बात की गई तो उन्होंने इस प्रकार की किसी भी सूचना से इंकार किया।
उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस बारे में पता करेंगे। यदि सेना की कोई यूनिट किसी बाढ़ पीड़ित परिवार को परेशान कर रही है, तो वे इस मामले में कार्रवाई करेंगे।