ऐसा ही एक सरकारी मिडिल स्कूल जिले के बुद्धल क्षेत्र में भी है, जहां मात्र दो कमरों में ही बच्चों को आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई करवाई जाती है।
स्कूल का एक कमरा हेड मास्टर के कार्यालय के लिए रखा गया है और बाकी एक कमरे में ही काम चलाया जा रहा है। आलम यह है कि बच्चों को खुले असमान के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने पर मजबूर हैं। बारिश हो तो स्कूल में समय से पहले ही छुट्टी कर दी जाती है।
तेज धूप में भी बच्चों को झुलसती धूम में पढ़ाई करनी पड़ती है। बच्चों के अभिभावकों और बच्चों में इसे लेकर काफी रोष है। उन्होंने बुद्धल के साथ भेदभाव खत्म कर जल्द नया भवन बनाने की मांग की है। बुद्धल युनाइटेड फ्रंट के वाइस चेयरमैन शाहनवाज खाकी ने सरकार के प्रति रोष प्रकट करते हुए कहा कि बुद्धल जिले का बहुत दूरदराज का क्षेत्र है।
राज्य में किसी की भी सरकार हो लेकिन बुद्धल के साथ भेदभाव खत्म नहीं होता है। उक्त मिडिल स्कूल के भवन की हालत के चलते जहां एक तरफ बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ बच्चों को मिड डे मील भी सही प्रकार से नहीं मिल रहा है।
यह बच्चों के अधिकार के साथ खिलवाड़ है। वहीं इस संबंध में सीईओ राजोरी अल्ताफ हुसैन चौधरी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उक्त मिडिल स्कूल के भवन की मरम्मत और कुछ नए कमरे बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
सीईओ ने उम्मीद की है कि जल्द ही फंड उपलब्ध होंगे और समस्या का समाधान हो जाएगा।