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करीब 11 महीने बाद स्कूल खुले,लेकिन स्कूलों में नहीं दिखी बच्चों की अधिक संख्या

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स्कूल पहुंचने पर हाथों को सैनिटाइज करती छात्राएं।
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राजोरी। कोरोना मामलों में कमी आने के बाद प्रशासन की ओर से जारी गाइड लाइन का पालन करते हुए कक्षा नौ से बारहवीं तक के स्कूल सोमवार को खोल दिए गए। राजोरी के अधिक स्कूलों में बच्चों की संख्या बहुत कम रही। शिक्षा विभाग की ओर से कुछ गाइड लाइन जारी की गई है। इसमें सामाजिक दूरी का पालन, सैनिटाइजर का इस्तेमाल आदि अनिवार्य किया गया है।
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कोरोना के चलते मार्च में जम्मू-कश्मीर के सभी शैक्षिक संस्थान बंद कर दिए गए थे, लेकिन अब करोना वैक्सीन आने के बाद जम्मू में प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय खोलने का फैसला किया है। प्रशासन की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक हर कक्षा के बच्चों को शिफ्ट में पढ़ाने का भी निर्देश जारी किया गया है। विभाग की ओर से यह निर्देश इसलिए जारी किया गया है ताकि कोरोना संक्रमण को देखते हुए छात्रों के बीच सामाजिक दूरी को सुनिश्चित किया जाए। सरकार के इस फैसले का शिक्षक और छात्र दोनों ही स्वागत कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि इन 11 माह में उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई की है, और 2जी सेवा के चलते ऑनलाइन पढ़ाई करने में काफी दिक्कत आती रही। अब स्कूल खुलने से उनकी पढ़ाई में सुधार आएगा।
स्कूलों को खोलने से पहले प्रशासन और स्कूल संचालकों की तरफ से परिसर की अच्छे तरीके से सफाई की गई है। बसों और कक्षाओं को भी सैनिटाइज किया गया। साथ ही स्टूडेंट्स को कोरोना के प्रति जागरूक रखने के लिए कुछ स्कूलों ने सामाजिक दूरी, मास्क, हैंड सैनिटाइजेशन के चित्रों से जुडे़ पोस्टर भी चिपकाए हैं।
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प्रशासन की ओर से कहा गया कि स्कूल में हैंड सैनिटाइजर, मास्क और सामाजिक दूरी का ख्याल रखना होगा। कक्षा में निर्धारित संख्या में ही छात्रों की उपस्थित रखनी होगी। कोरोना से जुड़े नियमों के संबंध में प्रशासन पहले ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी चुका है।
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कमजोर नेटवर्क के चलते नहीं हो पाई पढ़ाई
नौशेरा। कोविड-19 के कारण 11 माह के बाद सोमवार स्कू ल खुलने पर विद्यार्थी खुशी के साथ ही पहुंचे। उनमें यह खुशी दिखी कि कमजोर नेटवर्क के चलते जो ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाई है उसे वह अब स्कूल में कवर कर सकते हैं। पहले दिन बच्चों की हाजिरी कम रही। नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के चेहरों पर खुशी देखी गई।
इस संबंध 12वीं कक्षा की छात्रा हरमीत कौर, निकिता वर्मा, रिया कपूर ने बताया कि कि सरकार का धन्यवाद प्रकट करते हैं। जिन्होंने स्कू ल खुलवाए। लॉकडाउन के चलते आनलाइन क्लास लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नेटवर्क की कमी के चलते हम पढ़ाई नहीं कर पाते थे। जो स्कू ल में शिक्षा मिल सकती है, वो घर में मुश्किल है। वहीं दसवीं कक्षा की मनदीप कौर, आबिदा अख्तर, काजल कुमारी, वंश सिंह, मुस्कान कुमारी आदि ने बताया कि स्कूल में आकर हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हर किसी के पास मोबाइल नहीं होता, हर जगह नेटवर्क की कमी। 4जी न होने के कारण पढ़ाई करना काफी मुश्किल हो चुका था। जो दिशा निर्देश व शिक्षा स्कूलों में मिल सकती है, वो घर में कर पाना असंभव है। संवाद
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उत्साह से 11 माह बाद स्कूल पहुंचे विद्यार्थी
सुंदरबनी। कोविड-19 के फैलने के बाद मार्च से बंद हुए सभी शिक्षा संस्थानों को कक्षा नौ से 12 वीं तक खोलने के निर्देश मिलने के बाद सोमवार को विद्यार्थी स्कूलों में उत्साह से पहुचे। हालांकि पहले दिन स्कूलों में उनकी उपस्थिति कम ही रही। स्कूलों में स्टाफ की उपस्थिति पूरी रही। 11 माह के बाद स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई रूटीन के अनुसार शुरू कर दी गई। सरकार की ओर से जारी किए निर्देश पर स्कूल में सामाजिक दूरी तथा मास्क का इस्तेमाल करने की हिदायतें दी गई। हाई तथा हायर सेकेंडरी स्कूलों के खुलते ही स्कूलों में 11 माह से गायब रौनक एक बार फिर लौट आई। इसके साथ मिडिल तथा प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत स्टाफ ने भी स्कूलों को खोलकर साफ सफाई कराने का काम शुरू कर दिया ताकि जैसे ही मिडिल तथा प्राइमरी स्कूलों को खोलने के निर्देश मिलें तो स्कूलों को खोला जाए। संवाद
सेरीकल्चर विभाग ने साढ़े नौ हजार पौधों का किया वितरण
सुंदरबनी। रेशम उत्पादन बढ़ाने के लिए कीट पालकों की सुविधा के लिए सेरीकल्चर विभाग की ओर से सुंदरबनी के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को साढे़ नौ हजार शहतूत के पौधों का वितरण किया गया। इस संबंध में सेरीकल्चर विभाग के ब्लाक अधिकारी मदन लाल ने बताया कि सुंदरबनी में रेशम की रिकार्ड पैदावार को देखते हुए विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए साढे़ नौ हजार पौधे वितरित किए हैं, जिन्हें किसान अपनी खाली जमीनों में लगाएंगे जो बाद में रेशम के कीट पालने में सहायक होंगे। संवाद
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