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ज्ञान गंगा आश्रम राजोरी में ॐगंगा दशहराॐ पूरे उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। ज्ञान के प्रसार में गुरु गंग देवजी की

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ज्ञान गंगा आश्रम में गंगा दशहरा मनाते स्वामी विश्वामानन्द। - फोटो : RAJOURI
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राजोरी। एसवीएस ज्ञान गंगा आश्रम में गंगा दशहरा उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इसमें परम पावन अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती की अध्यक्षता में देश भर से हजारों भक्तों ने इस समारोह में भाग लिया। इसमें श्रीमद्भागवत कथा रखी गई, जो एक जून को कलश यात्रा के साथ शुरू हुई और वीरवार को संपन्न हुई। इसमें कृष्ण लीला की विभिन्न घटनाएं और पहलू रहे। विभिन्न पात्रों द्वारा चित्रित और विस्तृत विवरण श्री स्वामीजी द्वारा दिया गया था।
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स्वामी जी ने कहा कि श्री गुरु गंग देवजी महाराज ने देश के कोने-कोने में सभी को शिक्षा देकर ज्ञान के प्रसार में जो योगदान दिया है। उसकी तुलना नहीं की जा सकती और हम उनके मार्ग पर चल रहे हैं। गुरुजी हमेशा मानते थे कि अज्ञान को केवल ज्ञान से ही मारा जा सकता है, और श्री स्वामी द्वारा विभिन्न शिक्षण संस्थानों की स्थापना सभी को शिक्षा देकर उनके (गुरुजी) मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक ऐसा कदम है। सप्ताह भर चलने वाले समारोह के दौरान, मुख्य वक्ता स्वामीजी, कथा में, भगवान कृष्ण के जीवन इतिहास के हर पहलू को विभिन्न पात्रों की मदद से समझाया गया, जिन्होंने सुदामा, कंस, रासलीला जैसी विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।
श्रीमद्भागवत वह प्रकाश प्रदान करते हैं जो जीव (मनुष्य) को मुक्ति की अद्भुत स्वतंत्रता का अनुभव करने में सक्षम बनाता है। समापन समारोह 9 जून को संत सम्मेलन और श्रद्धांगली के साथ शुरू हुआ, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए विभिन्न अखाड़ों के संतों और महामंडलेश्वरों ने भाग लिया और विभिन्न धार्मिक मान्यताओं पर विचार दिए। महामंडलेश्वर स्वामी जम्मू के अक्षरानंदजी, ब्रह्मचारी विशाल चेतन, काशी (यूपी) थे।
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