नौशेरा में कथा के दौरान कृष्ण लीला का मंचन।
नौशेरा। श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर संतोष दास मोनी की देखरेख में शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में राजीव लोचन दास ने कहा कि पापी से पापी मनुष्य संतों की संगत पाने से पाप मुक्त हो जाता है। अजामिल एक ब्राह्मण था और कुसंग करने के साथ पाप करने लगा।
उसके कल्याण के लिए उसकी पत्नी ने एक संत से कहा कि महाराज कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे पति का कल्याण हो सके। संतों ने उसकी पत्नी को कहा कि अपने बेटे का नाम नारायण रखो। जब अंत समय आया तो अजामिल अपने बेटे नारायण को जोर-जोर से आवाज लगाने लगा। तभी भगवान खुद नारायण भगवान के दूत भगवान की दाम में लेकर गए। भगवान के नाम की इतनी महिमा है तो भगवान की भक्ति की कितनी महिमा होगी। ध्रुव के प्रसंग को सुनाकर लोगों को शिक्षा देते हुए कहा कि ध्रुव को सौतेली मां के व्यवहार के कारण जब घर से बाहर निकाल दिया गया। तो खुद रूप जी जब घर आते हैं। सबसे पहले सौतेली मां को प्रणाम करते हैं। यही बात भगवान राम जब 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या में पधारे तब भी उन्होंने सबसे पहले सौतेली मां को प्रणाम किया। कथा उपरांत आरती पूजन किया गया।