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Rajouri News: नौशेरा के लाम क्षेत्र में शहीद प्रीतम सिंह को दी श्रद्धांजलि

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सेवानिवृत्त होने के बाद भी देश के लिए दिया बलिदान, 1965 की लड़ाई में हुए शहीद
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संवाद न्यूज एजेंसी

नौशेरा। राजोवा लाम में शुक्रवार को शहीद प्रीतम सिंह और 1965 के अन्य शहीदों के स्मारक पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इसमें कमांडर नौशेरा ब्रिगेड बीर बिक्रम समेत कई अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। इस बीच अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) करतार सिंह, तहसीलदार किला दरहाल विवेक चंद्र भी मौजूद रहे।
शहीद की याद में 4 अक्तूबर को गुरुद्वारा सिंह सभा लाम मैदान में श्रीअखंड पाठ रखा गया। शुक्रवार को उसका समापन हुआ। लाम के वीर नायक शहीद प्रीतम सिंह की कहानी सुनकर हर आंख नम हुई। मौके पर शहीद के छोटे भाई ईशर सिंह ने बताया कि 1964 में नौशेरा के राजोवा निवासी प्रीतम सिंह को सेना से समय से पहले सेवानिवृत्ति मिल गई थी। जब 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया, तो स्थानीय सेना इकाई 14वीं कुमाऊं रेजिमेंट के कमांडेंट ने प्रीतम और क्षेत्र के अन्य पूर्व सैनिकों को यूनिट के साथ सहयोग करने और घुसपैठियों और पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ने में मदद करने के लिए बुलाया।
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प्रीतम सिंह कुमाऊं रेजिमेंट की बी-कंपनी (स्वयंसेवक के रूप में) में शामिल हो गए, जो 5 अक्तूबर, 1965 की रात को ओपी टॉप हिल की ओर बढ़ी। इसे पाकिस्तानी सेना के नेतृत्व में घुसपैठियों ने पकड़ लिया। 6 अक्तूबर 1965 की सुबह ओपी टॉप हिल पर तोपखाने की आग से अंतिम हमला किया गया था। पाकिस्तानी सेना ने तोपखाने की गोलीबारी का भी सहारा लिया था। प्रीतम सिंह को छर्रे लगे और उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान कर दिया। प्रीतम सिंह 6 अक्तूबर 1965 को शहीद हो गए थे। बाद में राजोवा में एक स्मारक बनाया गया, जहां परिवार के सदस्य, सेना और नागरिक प्रशासन के अधिकारी हर साल शहीद को श्रद्धांजलि देते हैं।
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