अधूरे वादों से ठप पड़ा व्यापार :
विधायक सुनील कुमार शर्मा ने मंदिर निर्माण के लिए लगभग दो करोड़ देने का आश्वासन दिया था जो धरातल पर नहीं उतर पाया है। इसी प्रकार आर्मी गुडविल स्कूल की स्थापना की योजना भी चर्चाओं तक सीमित है। मचैल माता यात्रा मार्ग के आधुनिक विकास के कारण यात्री सीधे दर्शन के लिए निकल जाते हैं। इससे ढाबों और स्थानीय दुकानों में ग्राहकों की कमी से कारोबार बंद होने के कगार पर है।
कागजों में उलझी योजनाएं :
आपदा में सब कुछ खो चुके परिवारों के लिए स्थायी आवास आज भी सपना है। ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उन तक नहीं पहुंच सका जो वास्तव में बेघर हुए हैं। लोगों का आरोप है कि आवंटन प्रक्रिया में विसंगतियां हैं जिससे पीड़ित सहायता से वंचित रह गए हैं। कुछ ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाकर अपने स्तर पर पुनर्निर्माण शुरू किया है लेकिन काफी आबादी आज भी असुरक्षित और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।
मानसून और बाढ़ की चिंता :
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता आगामी मानसून और संभावित बाढ़ को लेकर है। बाढ़ सुरक्षा के लिए जिस सुरक्षा दीवार का वादा किया गया था उसका निर्माण कार्य शुरू न होने से लोग भयभीत हैं। भीषण सर्दी के बाद अब गर्मी के मौसम के आगमन के साथ चिशोती के लोग सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उनकी मांग केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस पुनर्वास, सुरक्षा दीवार का निर्माण और रोजगार के अवसरों की बहाली है ताकि ऐतिहासिक गांव में रौनक लौट सके।