लेह जिले में सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों को साफ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए एक बड़ा सफाई अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान की तैयारी के लिए लद्दाख के मुख्य सचिव डॉ. पवन कोतवाल ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभिन्न विभागों और संस्थाओं ने भाग लिया।
यह अभियान उपशी से फेय तक सिंधु नदी के किनारे चलाया जाएगा और इसमें सभी गांव, सरकारी विभाग, सैन्य संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन शामिल होंगे।
मुख्य सचिव डॉ. कोतवाल ने इस अभियान को मिशन मोड में चलाने का आह्वान किया और कहा कि सिंधु नदी को साफ़ रखने के लिए प्रदूषण के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने छोटी प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध लगाने और कम से कम 2 लीटर की बोतलों को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की, ताकि प्लास्टिक कचरे में कमी लाई जा सके।
उन्होंने सैन्य बलों, बीआरओ, आईटीबीपी, वायु सेना और अन्य एजेंसियों से कहा कि वे अपने क्षेत्रों में सफाई सुनिश्चित करें। साथ ही, अस्पतालों और सेना के कैंपों में कचरा निपटान की व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए, ताकि चिकित्सा या अन्य अपशिष्ट नदी में न जाने पाए।
लेह के उपायुक्त रोमिल सिंह डोंक ने बताया कि यह अभियान दो सप्ताह तक चलेगा और इसमें सिंधु के अलावा ज़ांस्कर, सिंघे लालोक और शाम घाटी की सहायक नदियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
एलएएचडीसी के अध्यक्ष एडवोकेट ताशी ग्यालसन ने कहा कि सिंधु नदी केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों की जीवनरेखा और सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने बताया कि गांवों के नंबरदार जनजागरूकता अभियान चलाएंगे और प्रोजेक्ट त्सांगदा जैसे संगठनों की भूमिका को भी सराहा, जो पहले से अपशिष्ट प्रबंधन में सक्रिय हैं।
उन्होंने चोगलामसर में नदी में कचरा फेंकने, और सड़क निर्माण परियोजनाओं से जुड़े श्रमिकों द्वारा खुले में शौच जैसी समस्याओं पर चिंता जताई और इनके समाधान के लिए उचित सुविधाओं की मांग की।
अभियान के एक भाग के रूप में, 12 अगस्त को पूरे जिले में सफाई आंदोलन मनाया जाएगा, जिसमें सभी स्कूलों और गांवों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्वच्छता के महत्व को लोगों तक पहुंचाना है।