शुक्रवार को कई वर्षों से मांगे पूरी न किए जाने से गुस्साए पीएचई आईटीआई डिप्लोमा होल्डर्स ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि पीएचई मंत्री ने बार-बार हमारे साथ वादाखिलाफी की है, इसे अब सहन नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि अब यह साबित हो गया है हर सत्ताधारी पार्टी मजदूर विरोधी रवैया अपनाती है।
यह ट्रेंड बन गया है कि यदि कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं तो उनके आंदोलन को तोड़ने के लिए उनकी मांगें पूरी करने का वादा करो और जब आंदोलन खत्म हो जाए जो कर्मचारियों से किए वादे भूल जाओ। उन्होंने कहा कि सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके अस्थायी कर्मचारियों डिप्लोमा होल्डर्स को स्थायी करने, दिहाड़ीदारों का वेतन 4500 रुपये से बढ़ाकर 15000 रुपये करने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य की पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार ने हमारे छह महीनों तक चले काम छोड़ो हड़ताल और आंदोलन को समाप्त करवाने के लिए तीन बार हमसे हमारी मांगों को पूरा करने का वादा किया। अंतिम बार हमें लिखित में आश्वासन भी दिया गया कि सभी अस्थायी कर्मचारियों को क्रमबद्ध तरीके से स्थायी किया जाएगा।
इसमें सबसे पहले लैंड डोनर्स को स्थायी किया जाएगा। उसके बाद बारी-बारी से अन्य लोगों को, लेकिन जम्मू में सचिवालय बंद होकर कश्मीर में खुल जाने के बाद भी एक भी अस्थायी कर्मचारी को स्थायी करने की पहल नहीं की गई है और न वेतन ही बढ़ाया गया है। आज भी हम लोगों को 4500 रुपये महीना वेतन पांच छह माह बाद मिल रहा है।