मंडी तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत विभाग की लापरवाही से खंभों के बजाए पेड़ों के साथ लगाई गई बिजली की तारें हादसों का सबब बन सकती हैं।
इसे लेकर लोगों में विभाग के प्रति काफी रोष है। लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र में पेड़ों से बंधी ताराें से करंट के साथ कई जानवरों की मौत हो चुकी है। बार-बार मांग करने पर भी विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभे नहीं लगाए हैं।
गौरतलब है कि मंडी तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों मरकोट, चिखड़ीबन, लोअलबेला, अढाई आदि में अधिकतर क्षेत्रों में लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए मुख्य तारों को खंभों पर बांधने के बजाए पेड़ों के साथ बांधा गया है। इससे हरे भरे पेड़ों में कई बार करंट दौड़ जाता है, जिससे उसकी चपेट में आने वाले जनवरों की मौत हो जाती है।
विद्युत विभाग की इस लापरवाही से परेशान क्षेत्र निवासियों मोहम्मद शकूर, शबनम हुसैन, अनायतउल्ला, मोहम्मद फरीद, जमाल दीन आदि का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र के कारण विद्युत विभाग द्वारा करीब करीब हर गांव में जरूरत से आधे खंभे लगाए जाते हैं, क्योंकि ऊंचाई पर खंभे पहुंचाने और उन्हें गाड़ने का जोखिम उठाने के बजाए विभाग ने अधिकतर बिजली की मुख्य तारों को पेड़ों के साथ बांधकर बिजली की सप्लाई की कर रखी है।
विभाग इस तरफ कोई ध्यान ही नहीं देता है। इसके कारण आए दिन ग्रामीण क्षेत्रों में हादसों का डर बना रहता है। इन लोगों का कहना है कि आज तक पेड़ों से बंधी बिजली की तारों से दर्जनों जानवर मारे जा चुके हैं और करीब तीन ग्रामीणों की भी जान जा चुकी है, लेकिन उसके बावजूद बिजली विभाग मूक दर्शक बना बैठा है। हसीनुददीन ने बताया कि बिजली विभाग की ये बहुत बड़ी लापरवाही है।
खंभों की जगह पेड़ाें से तार बांधने पर लोगों को ही नहीं पक्षियों को भी खतरा है। आंधी-तूफान के बीच अगर पेड़ गिर जाते हैं, तो फिर बिजली के तार भी गिर जाएंगे।