पुंछ। जिले की मेंढर तहसील के मनकोट अंतर्गत पड़ने वाले एलओसी से सटे गांव दबराज तक आज भी सड़क नहीं पहुंची है। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से यहां के ग्रामीण वंचित हैं। हजारों ग्रामीणों को हर दिन आठ से दस किलोमीटर तक पैदल चल कर गांव से बाहर जाना-आना पड़ता है।
पाकिस्तानी गोलाबारी के निशाने पर रहने वाले इस गांव में सड़क नहीं होने से आपात स्थिति में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ जाती है। आए दिन पाकिस्तानी की तरफ से गांव में गोलाबारी की जाती है। कई बार ऐसा हुआ कि गोलाबारी से घायल हुए ग्रामीणों को सड़क नहीं होने के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और उनकी मौत हो गई।
गांव निवासियों मोहम्मद रशीद, अब्दुल हमीद, मोहम्मद कबीर आदि का आरोप है कि दो दशक पहले गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन आज तक न तो सड़क का निर्माण ही पूरा किया गया है और न ही उस पर कंकर तक बिछाया गया है। इस कारण गांव तक गाड़ी आना तो दूर मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर तक नहीं आ सकता है। गांव में तकरीबन हर दिन पाकिस्तानी सेना की तरफ गोलाबारी की जाती है, जिसमें कोई न कोई घायल हो जाता है।
सड़क के अभाव में घायलों की हो जाती है मौत
गांव के लिए सड़क नहीं होने के कारण यहां से घायलों को ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं आ सकती है। ऐसे में घायलों को गोलाबारी के बीच कंधों पर उठा कर मनकोट गांव तक ले जाना पड़ता है। फिर वहां से मेंढर अस्पताल पहुंचाते-पहुंचाते घायल की रास्ते में ही मौत हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर डाल कर मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं। कई बार रास्ते में उनका प्रसव हो जाता है। इसलिए सरकार एवं प्रशासन से हमारी मांग है कि गांव के लिए पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि हम लोगों को परेशानियों से निजात मिल सके।