पुंछ। जिले की मंडी तहसील के दूरदराज भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे गांव गगड़ियां में चार परिवारों के करीब एक दर्जन बच्चे ऐसे हैं जो देखने में सबसे अलग हैं। सुनहरे बाल और अत्यधिक गोरे रंग से विदेशी दिखने वाले यह बच्चे अजीब सी समस्या से जूझ रहे हैं। इन्हें सूरज की रोशनी में दिखाई नहीं देता। सूरज की रोशनी में इनकी आंखें चौंधिया जाती हैं। ऐसे में इन्हें सूरज उगने से पहले या अस्त होने के बाद ही सहजता से दिखाई देता है। सूरज की रोशनी में इनके लिए पढ़ाई करना भी संभव नहीं हो पाता।
बच्चाें के अभिभावकों ने बताया कि समाज कल्याण विभाग की तरफ से कुछ समय पहले से बच्चों को दिव्यांगों की तरह पेंशन दी जा रही है, लेकिन उचित इलाज कर इन्हें सामान्य बच्चाें की तरह पढ़ने लायक अवस्था में लाया जाना चाहिए। अभिभावकों ने कहा कि बच्चाें की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
एक गांव में दर्जन भर ऐसे बच्चे होने को लेकर नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर कुलदीप कुमार का कहना है कि कई बार पोषण की कमी खासकर विटामिन-सी की कमी के कारण बच्चों में ऐसा होता है कि उन्हें सूरज की रोशनी में दिखाई नहीं देता। जैसे-जैसे सूरज की रोशनी कम होती है उन्हें दिखाई देने लगता है। ऐसे बच्चों को देखने पर उनकी बारीकी से जांच करने के बाद ही इस बात का पता चल सकता है। अभी तक ऐसे बच्चों का सही प्रकार से कोई उपचार जिले में उपलब्ध नहीं है।