पुंछ। किसी ने सच ही कहा है कि कठिनाई और जरूरत आविष्कार की जननी है। इस बात को जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों ने सच कर दिखाया है। किसानों ने पहाड़ों से घास नीचे पहुंचाने के लिए एक नई तरकीब निकाली है। इसे उन्हें न सिर्फ जान जोखिम में डाल कर पशुओं के चार माह के चारे के लिए घास की ढुलाई से छुटकारा मिला है, बल्कि वह अब दस लोगों के बजाय दो लोगों के सहयोग से चंद घंटों सैकड़ों गड्डी घास पहाड़ से नीचे घरों के आसपास अथवा सड़क किनारे पहुंचा रहे हैं। जहां से वह वाहनों से घास को यहां वहां ले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि हर वर्ष इस सर्दी में किसानों सूखी घास को घरों तक पहुंचाने के लिए पहाड़ों से घास कंधों पर उठा कर जान जोखिम में डालकर कई घंटे लगाकर ढुलाई करनी पड़ती थी। इसमें अक्सर कई लोगों की पहाड़ से फिसल कर नीचे गिर जाने से मौत हो जाती थी, अथवा कई लोग घायल होने से सदा के लिए दिव्यांग हो जाते थे। इतना ही नहीं पहाड़ों से घास नीचे सड़क अथवा घरों तक लाने के लिए उन्हें आठ दस लोगों का सहयोग लेना पड़ता था, लेकिन अब जिले के किसानों ने मंडी, लोरन, सावजियां, गगडियां, शाहपुर, गूंतरियां, मडा, कुलाली जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से घास को घरों तक पहुंचाने के लिए एक नई तरकीब निकाली है, जिससे वह कम समय में कम लोगों की सहायता से जल्दी घास घर तक पहुंचा रहे हैं। साथ ही हर वर्ष घास ढुलाई में होने वाले जानी नुकसान से भी छुटकारा पा रहे है। अब किसान पहाड़ों की ऊंचाई पर जहां उनकी घास उगती हैं। वह वहां घास कटाई कर घास को एक स्थान पर जमा कर लेते हैं। फिर वह किसी पेड़ के साथ कई सौ मीटर लंबी प्लास्टिक की रस्सी बांधते हैं, और उस रस्सी को नीचे सड़क किनारे अथवा घरों के पास जमीन में एक खूंटी गाड़ कर उससे बांध देते हैं। उसके बाद पहाड़ पर एक या दो लोग लोहे की हूक लगा कर घास के गड्ढों को हूक में फंसा नीचे की तरफ धकेलते हैं। तो कुछ ही पलों में वह घास नीचे मौजूद एक व्यक्ति के पास पहुंच जाता है। वहां मौजूद व्यक्ति उस घास को रस्सी से अलग करके जमा करता है। जहां से वह उसे आसानी से घर ले जाते हैं। इस नई तरकीब से किसानों में काफी खुशी है।
इसको लेकर मंडी तहसील के पलेरा गांव निवासी अकबर दीन, खलील अहमद, मोहम्मद सुभान ने बताया कि हमारी घास की जमीन पहाड़ की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पर सड़क नहीं है। उस स्थान पर पहुंचने के लिए हमें दुर्गम चढ़ाई चढ़ कर जाना पड़ता है और घास उठा कर नीचे उतरते समय अकसर कोई न कोई हादसे का शिकार हो जाता है। ऐसे में गत वर्ष हमारे कुछ साथियों ने यह रस्सी की तरकीब निकाली, जिसके के बाद हम लोगों का घास ढुलाई का काम काफी आसान हो गया है। इसमें कम लोगों की जरूरत पड़ती है और कम मेहनत लगती है। साथ ही पहाड़ से गिरने और जान जाने का खतरा भी समाप्त हो गया है।