पुंछ। निर्जला एकादशी का पर्व बड़े ही श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। सनातन धर्म के अधिकतर अनुयायियों ने व्रत रखा और मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की। लोग बहनों एवं बेटियों के घरों में पानी से भर बर्तन, शरबत, खाने पीने का सामान और फल आदि देने के लिए भी पहुंचे।
दूसरी तरफ इस बार निर्जला एकादशी पर भी कोरोना का प्रभाव पूरी तरह देखने को मिला, जिसके चलते इस बार जिले में मात्र कुछ ही स्थानों पर लोगों द्वारा मीठे पानी की छबीलें और लंगर लगाए गए। उन पर भी बहुत कम भीड़ देखने को मिली कोरोना संक्रमण से डरे हुए लोगों एवं धार्मिक संगठनों द्वारा मीठे पानी की छबील और लंगर लगाने से पूरी तरह परहेज किया गया। सोमवार को सुबह से ही जिले के अन्य क्षेत्रों के साथ पुंछ नगर में भी निर्जला एकादशी को लेकर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। व्रत रखने वाले लोग विशेष पूजा अर्चना करते नजर आए। वहीं दिन के आगे बढ़ने के साथ ही बड़ी संख्या में लोग पानी से भरे बर्तन और अन्य सामान उठाए बेटियों एवं बहनों के यहां आते जाते दिखाई देने लगे थे।
उधर धार्मिक संगठनों के लोगों का कहना था कि इस बार भी कोरोना को देखते हुए हमने लंगर एवं मीठे पानी की छबील नहीं लगाई है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। जिन स्थानों पर इक्का दुक्का छबीलें लगी थीं वहां काम कर रहे लोगों की तरफ से कोरोना से बचाव के सभी उपाय अपनाए गए थे। साथी लोगों को डिस्पोजल गिलासों में ही शर्बत पिलाया गया।
मीठे पानी की छबीलें लगाकर लोगों की प्यास बुझाई
सुंदरबनी। निर्जला एकादशी पर जगह-जगह मीठे पानी की छबीलें लगाकर लोगों की प्यास बुझाई गई। सुंदरबनी तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में निर्जला एकादशी पर हर वर्ष लोगों द्वारा मीठे पानी की छबीलें तथा पूरी छोले के स्टाल लगाकर लोगों को प्रसाद का वितरण किया जाता रहा है, लेकिन दो वर्ष से कोविड-19 के लिए जारी बंदिशों के कारण लोगों द्वारा पूरी छोले के स्टाल तो नहीं, लेकिन कोविड के लिए जारी एसओपी पर अमल करते हुए लोगों ने मीठे पानी की छबीलों का ही आयोजन किया और राहगीरों की प्यास बुझाई। अधिकांश महिलाओं ने घरों में बर्तन का दान किया और घरों के पास ही छोटी-छोटी छबील लगाकर लोगों की प्यास बुझाई। संवाद
राम नाम के जयकारे से सारा माहौल भक्तिमय बना रहा
नौशेरा। निर्जला एकादशी पर नौशेरा व आसपास के मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर उपवास रखा। नौशेरा, थाती, राजल, बगनोटी, लंबेड़ी, सेरी, गगरोट, भवानी, खेडी, तराट आदि क्षेत्र में जगह-जगह मीठे पानी की छबील व अन्य स्टाल लगाए गए। भजन सत्संग दानपुण्य किया गया।
राम नाम के जयकारे से सारा माहौल भक्तिमय बना रहा। आचार्य पंडित नरेंद्र शर्मा ने बताया कि भीमसेन द्वारा व्रत रखने पर इस एकादशी को भीमसेन के नाम से जाना जाता है। इस दिन बिना जल, अन्न के व्रत करने व भगवान का भजन करने का महान पुण्य की प्राप्ति होती है।