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गोलाबारी शुरू होते ही सुनसान हो जाती है गांव करमाड़ा की सड़के,गोलियों के गांव में लगने से हर किसी को सताने लगा है जान जाने का डर

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गोलाबारी होते ही वीरान हो जाती हैं करमाड़ा की गलियां
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सड़कों पर नहीं नजर आते वाहन, जान बचाने के लिए घरों में छुप जाते हैं ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
पुंछ। पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी से करमाड़ा गांव की सड़कें एवं गलियां पलक झपकते ही वीरान हो जाती हैं। गोली लगने से जान जाने के डर से ग्रामीण आनन-फानन में घरों में छुप जाते हैं। जब तक गोलाबारी थम नहीं जाती पूरे गांव में खामोशी छाई रहती है।
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करमाड़ा निवासी मोहम्मद शबीर, अब्दुल मजीद, मोहम्मद हीसाक कोहली आदि का कहना है कि पहले जब गोलाबारी शुरू होती थी तो वे घंटों तक बेखौफ सड़क पर आवाजाही कर लेते थे, क्योंकि गांव की इस मुख्य सड़क तक कभी कोई गोली नहीं आती थी। पिछले एक हफ्ते से न जाने पाकिस्तानी सेना को क्या फितूर जागा है या फिर उसके पास कोई नई गन आई है, जिसकी गोलियां यहां गांव की मुख्य सड़क तक आ रही हैं। इससे हर किसी को जान का खतरा बन गया है। इनका कहना है कि पहले जब भी गोलीबारी शुरू होती थी तो पहले भारतीय सेना की चौकियों पर ही होती है और उसके बाद जब गोलीबारी के बीच मोर्टार दागे जाने लगते थे तो हमें तब लगता था कि अब हमारे लिए खतरा बनने वाला है। अब कोई मोर्टार गांव में भी आकर गिर सकता है। उस समय हम सुरक्षित स्थानों पर चलते जाते थे। पिछले चार दिनों से जैसे ही गोलीबारी शुरू होती है तो सीधे गोलियां हमारे घरों, खेतों और सड़क पर आ कर लगती हैं। इससे हर कोई डरा हुआ है। इसलिए अब दो-तीन दिनों से गोलीबारी शुरू होते ही हमें घरों के अंदर भागना पड़ता है। इससे गोलीबारी शुरू होते ही गांव की सड़कें और गलियां सुनसान हो जाती हैं।
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