पुंछ। जिले में कई माह से पाकिस्तानी सेना की तरफ से नियंत्रण रेखा पर हर दिन गोलाबारी की जा रही है। इससे जहां आम लोग प्रभावित होकर रह गए हैं। वहीं जिले में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र के किसानों को खेतों में पक कर कटाई के लिए तैयार फसलों की चिंता सता रही है।
किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। इस बार उन्हें इस बात की भी उम्मीद नहीं है कि वह्र फसलों की कटाई कर अनाज घरों तक पहुंचा भी पाएंगे या नहीं। नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि जब भी वह खेतों का रुख करते हैं तो पाकिस्तानी सेना गोलाबारी शुरू कर देती है। इसके कारण उन्हें जान बचा कर घरों अथवा सुरक्षित स्थानों पर पनाह लेनी पड़ती है। किसानों का कहना है कि नियंत्रण रेखा पर पहले भी गोलाबारी होती थी, लेकिन इस बार जब से चीन की तरफ से एलएसी पर हरकतों में तेजी लाई है तो पाकिस्तानी सेना ने भी नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी का क्रम बढ़ा दिया है।
गांव दिगवार के सरपंच परविंदर सिंह, सुनील कुमार और सैद मोहम्मद का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना की 99 प्रतिशत गोलाबारी गांव में लोगों के घरों और खेतों पर की जाती है। ऐसे में हम इस बार फसल कैसे काट पाएंगे। हमें इस बात की चिंता सता रही है। अन्य किसानों का कहना है कि इन दिनों हमारे खेतों में मक्की, धान और साल भर के लिए पशुओं के चारे की घास कटाई के लिए तैयार खड़ी है, लेकिन पाकिस्तानी सेना हमें कटाई नहीं करने दे रही है।
गौरतलब है कि पुंछ में बालाकोट से लेकर सावजियां तक के नियंत्रण रेखा पर स्थित 110 किलोमीटर क्षेत्र में बालाकोट, मेंढर, मनकोट, कृष्णा घाटी, सलोत्री, जलास, करमाड़ा, खड़ी, कोसलियां, अजोट, गुलपुर दिगवार, दलान, माल्टी, दिगवार तेड़वां, डोकरी, कीरनी, कस्बा, शाहपुर, इस्लामाबाद, चापड़ियां, यावजियां, गगडियां, उड़ीपुरा जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्र आते हैं, जिनमें हजारों कनाल कृषि भूमि पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित होती है। इन क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना की तरफ से दागे जाने वाले गोले और गोलियां भी आकर लगती हैं, जिसके कारण किसानों को फसलों की कटाई की चिंता सता रही है।