पुंछ। पिछले काफी समय से आतंकियों को घुसपैठ कराने में नाकाम हो रही पाकिस्तानी सेना अब बालाकोट क्षेत्र में लगातार रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी कर रही है। ताकि क्षेत्र के लोगों को अधिक से अधिक नुकसान हो और या तो वे पलायन कर जाएं या घरों में ही कैद रहें। जिससे गोलाबारी की आड़ में घुसपैठ करने वाले आतंकी सुरक्षित अपने ठिकानों पर पहुंच जाएं। अगर हम इस सितंबर महीने की बात करें तो 22 दिनों मे पाकिस्तानी सेना की तरफ से अकेले बालाकोट क्षेत्र में 12 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए रिहायशी इलाकों में 120 एमएम के मोर्टार दागे गए हैं जिसमें दर्जन भर घरों को नुकसान पहुंचा है और 50 के करीब मवेशी मारे गए हैं और साठ के करीब मवेशी घायल हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो पाकिस्तानी सेना की इस प्रकार की नापाक हरकत के पीछे सबसे बड़ा कारण है आतंकियों को सुरक्षित घुसपैठ न करा पाना क्योंकि एक तरफ जहां बालाकोट क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर तैनात सेना के जवान और अधिकारी पूरी तरह मुस्तैदी से 24 घंटे घुसपैठ कराने की कोशिशों को नाकाम बनाने में पूरी सफलता से जुटे हुए हैं। वहीं पाकिस्तानी सेना को इस बात का डर सता रहा है कि अगर कोई आतंकी दल घुसपैठ करने में सफल भी हो जाएगा तो क्षेत्र के लोग उसके बारे में सेना को सूचना देकर आतंकियों का सफाया करवा देंगे। क्योंकि इससे पहले भी जब कभी पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना की चौकियों पर गोलाबारी करते हुए उसकी आड़ में आतंकियों को सफलतापूर्वक घुसपैठ कराई तो उसके कुछ ही घंटों में क्षेत्र के लोगों की सूचना पर सेना ने घुसपैठ करने वाले आतंकियों को मार गिराया है। ऐसे में अब पाकिस्तानी सेना क्षेत्र के लोगों को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचा कर उन्हें घरों के अंदर सुरक्षित स्थानों पर छुपने को मजबूर कर आतंकियों की सुरक्षित घुसपैठ को सुनिश्चित बनाना चाहती है। ताकि गोलाबारी के समय कोई ग्रामीण बाहर नहीं होगा तो सेना को आतंकियों की घुसपैठ की सूचना भी नहीं मिलेगी।
गौरतलब है कि बालाकोट क्षेत्र से घुसपैठ करने वाले आतंकी आसानी से राजोरी जिले में पहुंच सकते हैं क्योंकि बालाकोट क्षेत्र राजोरी जिले के मंजाकोट, पतराड़ा और देहरी रलयोट जैसे क्षेत्रों से लगता है जहां से पूर्व में भी आतंकी घुसपैठ कर उक्त क्षेत्रों से होते हुए थन्ना मंडी तक पहुंच कर अपना डेरा जमाते रहे हैं।