पुंछ में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते सिख युवक।
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पुंछ। नगर स्थित बस अड्डे के पास सोमवार को सिख युवाओं ने केंद्र सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर में नई सरकारी भाषाएं नामांकित किए जाने के दौरान पंजाबी भाषा को उससे बाहर रखने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर सबका साथ-सबका विकास के नाम पर वोट लेने के बाद सिखों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इससे पहले कभी पंजाबी भाषा के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया गया है। जो वर्तमान में किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार विशेष कर प्रधानमंत्री से मांग की कि वह सिखों की धार्मिक भाषा जोकि सबकी प्रिय भाषा है उसको भी जम्मू कश्मीर की सरकारी भाषा का दर्जा दिया जाए। सोमवार को दोपहर को नगर स्थित बस अड्डे के पास दर्जनों की संख्या में सिख नौजवान सुखविंद्र सिंह, कमलजीत सिंह और तेजिंदर सिंह की अगुवाई में एकत्र हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करते हुए पंजाबी भाषा को जम्मू-कश्मीर की सरकारी भाषा का दर्जा देने की मांग की।
इस अवसर पर खुविंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पचास वर्ष तक सिखों ने राज किया और यहां पर पंजाबी भाषा का तब से प्रचार प्रसार है। इसे सभी लोग बोलते पढ़ते हैं। ऐसे में हमारी मांग है कि पंजाबी को सरकारी भाषा बनाने के साथ ही स्कूलों में कक्षा एक से इसमें पढ़ाई करवाने की व्यवस्था की जाए।