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पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी गोलीबारी में आई तेजी

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पुंछ। कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकी की तरफ से सीआरपीएफ के काफिले पर फिदाइन हमले के बाद देश भर में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। हर तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है। दूसरी तरफ पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी को तेज कर दिया है। रविवार देर रात से सोमवार की सुबह तक पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना की चौकियों के साथ ही रिहायशी इलाकों को निशाना बना कर भारी गोलीबारी की। सुबह जब ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकले तो उनके घरों की दीवारें गोलियों से छलनी नजर आईं।
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करमाड़ा के ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी क्षेत्र में गोलीबारी होती थी, लेकिन पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी गोलीबारी में काफी बढ़ोतरी हुई है। जानकारी के अनुसार रविवार की रात करीब 10.15 बजे जिले के करमाड़ा सेक्टर में नियंत्रण रेखा के उस पार तैनात पाकिस्तानी सेना की 41 बलूच रेजीमेंट ने अपनी अग्रिम चौकियों एलपी, एलपी वन, बकरी, बकरी वन व बकरी मेन से भारतीय सेना की 15 मराठालाई की चौकियों नोल, सुसर, बेगम एवं चीता के साथ ही रिहायशी इलाकों को निशाना बना कर हैवी मशीनगनों से गोलाबारी शुरू कर दी। इसका भारतीय सेना ने भी तत्काल उसी क्रम में जवाब देना शुरू कर दिया। इसके चलते सोमवार को तड़के करीब 4.10 बजे पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलीबारी बंद कर दी गई। इस बीच करमाड़ा गांव के रहने वाले भारत भूषण और नरेश चंद्र शर्मा के घरों पर पाकिस्तानी सेना की तरफ से दागी गई आधा बथ़न गोलियां लगीं, जो उनके घरों की दीवारों एवं फर्श में घुस गईं। पाकिस्तानी सेना की गोलियां दिखाते हुए ग्रामीणों का कहना था कि यदि पाकिस्तानी सेना की यह गोलीबारी दिन में होती तो न जाने कितने लोगों की जान चली जाती। रात में गोलीबारी की आशंका में ग्रामीण घर के अंदर सुरक्षित कोनों पर ही सोते हैं, लेकिन दिन में तो बच्चे, बुजुर्ग सभी बाहर ही होते हैं। करमाड़ा के ग्रामीणों का कहना था कि उनको लगा था कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद पूरी दुनिया का पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा फूटने से वह कुछ सुधरेगा, लेकिन उसने तो पहले से ज्यादा गोलीबारी शुरू कर दी है। इससे एलओसी से सटे इलाकों में डर का माहौल है।
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