पुंछ। जिले में नियंत्रण रेखा से सटे गांवों के लोगों को पाकिस्तानी गोलों से कहीं अधिक अंधाधुंध चलाई जाने वाली गोलियों से जान जाने का खतरा ज्यादा रहता है। ग्रामीणों की मानें तो जब पाकिस्तान गोले दागना शुरू करता है तो वे सुरक्षित स्थानों की तरफ भाग जाते हैं, लेकिन पाकिस्तानी सेना की तरफ से अचानक उनके गांवों व घरों को निशाना बना कर दागी जाने वाली गोलियों से बचने का कोई चारा ही नहीं होता है। ऐसे में लोगों के मारे जाने का खतरा ज्यादा रहता है।
भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर बसे ग्रामीण क्षेत्रों नाढ़ मनकोट, चोई मनकोट, बलनाई, बसूनी आदि में बसने वाले लोगों महमूद अहमद, वजीर मोहम्मद, हसनदीन आदि ने बताया कि जब पाकिस्तानी सेना की तरफ से जब गोले दागे जाते हैं, तो वे उसकी आवाज सुन कर सुरक्षित स्थान की ओर भाग निकलते हैं, लेकिन जब उस पार से अचानक एक साथ सैकड़ों गोलियां बरसाई जाती हैं तो वे भाग नहीं पाते हैं। इससे कोई न कोई उसकी चपेट में आ ही जाता है। ऐसे में यदि कोई गांव के रास्ते से गुजर रहा हो, खेतों में काम कर रहा हो या अपने घर के आंगन में बैठा हो, तो गोलियों का शिकार बन जाता है। इतना ही नहीं गोलाबारी कभी-कभार कुछ घंटों के लिए होती है, लेकिन गोलीबारी थोड़े-थोड़े अंतराल पर ज्यादा समय तक होती रहती है।