कश्मीरी पंडितों की कालोनी पर एक बार फिर रियासत की सियासत गरमाएगी। अलगाववादी इसके विरोध में हैं तो घाटी आधारित पार्टियों नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस भी इसके बारे में कुछ बोलने से कतरा रही है।
माना जा रहा है कि 25 मई से शुरू हो रहे बजट सत्र में इस मुद्दे को लेकर हंगामा तय है। अलगाववादियों ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि वे किसी भी कीमत पर कालोनी नहीं बनने देंगे। उधर, कश्मीरी पंडित भी जमीन चिह्नित किए जाने को लेकर एक राय नहीं हैं।
विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर घाटी में स्थान चिह्नित किए जाने के बाद कुछ कश्मीरी पंडित सरकार के इस प्रयास को सराह रहे हैं तो कुछ का कहना है कि केंद्र सरकार को कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर काम करना चाहिए। कश्मीरी पंडितों को समूह में बसाने के बजाय एक साथ बसाना चाहिए।
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष अश्वनी कुमार चुरंगू ने कहा कि केंद्र सरकार टाउनशिप के जरिये कश्मीरी पंडितों को समूह में बसाने का प्रयास कर रही है, जो सही नहीं है। सभी विस्थापित कश्मीरी पंडितों को एक साथ बसाया जाए। इसके अलावा सरकार कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों को साथ लिए बिना काम कर रही है।
पुनर्वास की योजना को लेकर कश्मीरी पंडितों के साथ कोई बातचीत नहीं की जा रही है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के प्रधान संजय टिक्कू ने सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि काफी कश्मीरी पंडित पहले से ही घाटी में रह रहे हैं। सरकार जब टाउन में कश्मीरी पंडितों को बसाती है तो इससे कश्मीरी पंडितों की एकता को बल मिलेगा। सरकार को इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए।