अस्सर में छह छात्राओं को बस से उतार कर पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटने का मामला प्रकाश में आया है।
इनमें से तीन छात्राएं किसी तरह पुलिस के चुंगल से भागकर अदालत जा पहुंची और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को आपबीती सुनाई।
साथ ही चोट के निशान और फंटे कपड़े दिखाए। दंडाधिकारी ने डीएसपी हेडक्वार्टर को मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं।
हालांकि अस्सर पुलिस ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि लड़कियों ने थाने पर हमला किया है।
पीड़ित तीन चचेरी बहनों हिना देवी, सरला देवी और नीरू देवी ने बताया कि वे अपनी चचेरी बहन नैना (15), रेखा (30), सीता (18) और उसके पिता बाबू राम (निवासी गगला डोडा) के साथ पढ़ाई के सिलसिले में जम्मू जा रहे थे।
अस्सर के पास पहुंचने पर एसएचओ अस्सर संजीव कुमार, एएसआई अहमदुल्ला शान ने बस को रोका और सभी छात्राओं और बाबू राम को बस से उतार लिया।
साथ ही बिना कुछ कहे पुलिस ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। छात्राओं ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें घसीटते हुए थाने ले गई और सादे कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा।
हस्ताक्षर का कारण पूछने पर फिर पीटा गया। इस बीच तीन बहनें पानी पीने के बहाने थाने से भाग कर कोर्ट पहुंची। कोर्ट में दिए बयान में उन्होंने कहा कि पुलिस ने नैना, रेखा, सीता को हवालात में बंद कर रखा है।
एसएचओ अस्सर संजीव गुप्ता ने बताया कि इन लड़कियों के दो रिश्तेदारों को दुष्कर्म के आरोप में पकड़ा गया है। जब भी पुलिस इस सिलसिले में छानबीन करने के लिए गांव जाती थी तो ये लोग पुलिस पर हमला कर देते थे।
आरोपियों को गिरफ्तार करने पर इन सभी ने थाने पर ही हमला कर दिया। किसी लड़की के साथ मारपीट नहीं की गई है और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया है।
वहीं एसपी डोडा मो. शरीफ चौहान ने इस तरह की किसी घटना से इनकार करते हुए कहा कि बलात्कार के आरोप में कार्रवाई करने गई पुलिस पर हमला किया गया।
इसमें हवलदार जख्मी भी हो गया है। जबकि लड़कियों ने कहा कि आरोपी उनके रिश्तेदार नहीं हैं और पुलिस झूठ बोल रही है।