जम्मू कश्मीर की छात्रा सुफिरा नजीर का अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का सपना टूटता नजर आ रहा है।
पासपोर्ट मिलने में हुई देरी के कारण उसे समय से अमेरिका का वीजा नहीं मिल सका है। हालांकि मामले में सुफिरा की पढ़ाई में मदद करने वाले यतीम स्कूल के चेयरमैन जहूर अहमद टाक ने दिल्ली स्थित संस्था के कार्यालय को मेल भेजा है। उसे अब ग्लोबल लीडरशिप एजूकेशन एंड फाउंडेशन के जवाब का इंतजार है।
तीन साल की उम्र में अपने पिता को खो चुकी सुफिरा नजीर को उनके चाचा के कारण पासपोर्ट के मिलने में देर हुई। दरअसल, उसके चाचा नब्बे के दशक में कथित आतंकवादी रहे।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद छह अगस्त को सुफिरा को आननफानन में पासपोर्ट तो मुहैया करवा दिया गया लेकिन अमेरिकी वीजा नहीं मिल सका।
सुफिरा कहती हैं कि पापा के गुजर जाने के बाद चाचा ने उन्हें और उनके चार भाई बहनों को पाल कर बड़ा किया। सरकार ने इसी को कारण बताकर मेरे भविष्य को अंधकारमय बना दिया।
अब सुफिरा की आखिरी उम्मीद उस यतीम स्कूल पर है, जिसमें उसने शिक्षा हासिल की है।
इस स्कूल के चेयरमैन ने संस्था के दिल्ली स्थित कार्यालय को ई-मेल भेजा है, जिसमें पासपोर्ट देरी का कारण स्पष्ट करते हुए सुफिरा के मामले पर सकारात्मक तरीके से विचार करने को कहा गया है। अब पत्र के उत्तर पर ही सुफिरा का भविष्य टिका है।