नेपाल और हिमालयी क्षेत्र में आई बाढ़ और तबाही को कश्मीर के लिए भी एक गंभीर चेतावनी बताते हुए मीरवाइज उमर फारूक ने घाटी के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा पर जोर दिया है। शुक्रवार को ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में नमाज के दौरान संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मीरवाइज ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर दुख जताते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और लापता लोगों की सुरक्षित वापसी तथा पीड़ित परिवारों के लिए राहत की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि कश्मीर भी उसी संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है, जहां हाल के वर्षों में भारी बारिश, बादल फटने, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन इन घटनाओं का एक बड़ा कारण है, लेकिन हमें अपने विकास के तरीके पर भी गंभीरता से विचार करना होगा। पहाड़ों को काटना, पेड़ों की कटाई, संवेदनशील इलाकों में होटल और भवनों का निर्माण तथा प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों में बदलाव भविष्य में बड़ी आपदाओं का कारण बन सकते हैं।