एनडीए का कुनबा बढ़ाने की कोशिशों को एक झटका लगा है। भाजपा के अघोषित पीएम इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी ने जम्मू में नेशनल कांफ्रेंस को भाजपा का पुराना साथी बताकर डोरे डाले थे लेकिन लाल कृष्ण आडवाणी के धारा 370 पर बयान से नेकां बिदक गई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आडवाणी पर पलटवार कर रहे हैं और भाजपा-नेकां में वाकयुद्ध छिड़ गया है। मोदी ने अपनी सर्वदलीय स्वीकार्यता को प्रमाणित करने के क्रम में नेकां के लिए एनडीए में शामिल होने का विकल्प खुला छोड़ा था लेकिन ताजा तल्ख विवाद से इसकी संभावनाएं धूमिल होती दिख रही हैं। पूरे विवाद से यूपीए को फायदा हो रहा है।
सनद रहे कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आयोजित रैली में जम्मू कश्मीर की सीमा से गरज रहे मोदी धारा 370 पर मौन रहे थे। उन्होंने कश्मीर के हालात पर चिंता जरूर जताई थी लेकिन वहां के युवकों में विकास की मुख्य धारा में शामिल होने की छटपटाहट को भी रेखांकित किया था।
मोदी ने कहा था कि कोटा में कश्मीर की तीन सौ लड़कियां प्रतियोगिता परीक्षाओं की कोचिंग ले रही है। इससे साफ है कि उनमें आईएएस, डाक्टर और इंजीनियर बनने की ललक बढ़ी है। कश्मीर के युवक के समझने लगे हैं कि बम और बंदूक से अपने लिए कुछ हासिल नहीं सकता। इसी क्रम में मोदी ने कहा कि वह जब जम्मू कश्मीर के प्रभारी थे तब फारुख अब्दुल्ला एनडीए के साथ थे।
मोदी को हार्डकोर हिन्दुवादी माना जाता रहा है लेकिन मौके की नजाकत को देखते हुए उन्होंने धारा 370 पर मौन साध लिया था लेकिन बाद में आडवाणी ने धारा 370 को हटाने की वकालत की जिससे नेशनल कांफ्रेंस खुलकर विरोध में खड़ी हो गई।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने यहां तक कहा कि धारा 370 को हटाने के लिए उनकी लाश से गुजरना होगा। बाद में यह सवाल खड़ा भी किया कि जब आडवाणी केंद्र की सत्ता में थे तब इस मुद्दे पर मौन क्यों साधा था। आडवाणी ने भी उमर का पलटवार करते हुए उन्हें संयमित भाषा के इस्तेमाल की नसीहत दी है और अब मामला तूल पकड़ चुका है।
पिछले माह तक नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच दूरियां बढ़ी थीं। अफजल गुरु की फांसी के बाद नेकां ने खुद को कांग्रेस से जोड़ने पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया था। नेकां की कार्यकारिणी में भी इस पर मंथन हुआ और फारुख अब्दुल्ला को इस पर विचार के लिए अधिकृत किया गया।
पीडीपी अफजल गुरु के मुद्दे पर ज्यादा तल्ख रही है। इसलिए प्रतिद्वंदी को रोकने के लिए नेकां ने रणनीति के तहत कांग्रेस से दूरी बढ़ाई थीं। अब ताजा विवाद ने नेकां को कांग्रेस के करीब ला खड़ा किया है जहां उमर फिर यूपीए की सरकार बनने का दावा करने लगे हैं।