आसमान से गिरे मैटराइटस जिसे स्थानीय भाषा में त्राट गोला कहते हैं। उस गोले को हासिल करके अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये के बेचने के चक्कर में कई लोग लाखों रुपये गवां रहे हैं। भद्रवाह, किश्तवाड़ आदि बेल्ट में त्राट को दिखाकर लोग कई लोगों को अब तक लूट चुके हैं।
इस मामले मेें पुलिस अभी तक सात मामले दर्ज कर चुकी है। नासा के वैज्ञानिक भी इस गोले से निकलने वाली धातु का उपयोग करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस गोले मेें यूरेनियम की अधिक मात्रा होती है, जो काफी दुर्लभ वस्तु है।
अंतरराष्ट्रीय रैकेट जम्मू के दूरदराज पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों काफी सक्रिय है। क्राइम ब्रांच और पुलिस इस मामले में पैनी नजर रखे हुई है। पिछले कुछ दिन पहले ही त्राट गोले के नाम से एक व्यापारी से करोड़ों रुपये ठगे गए। आंध्र प्रदेश, बंगलूरू आदि क्षेत्रों से लोग इसकी तलाश में घूम रहे हैं।
पुलिस के अनुसार त्राट गोला एक धातु है। इसकी कीमत बाजार में करोड़ों रुपये है। बिजली गिरने के दौरान यह गोला आसमान से गिरता है। वैज्ञानिकों की एक टीम भी इस गोले की जांच के लिए आती है और जांच के बाद मिलीभगत से करोड़ों रुपये का लालच दिया जाता है। कुद पुलिस स्टेशन, ठाठरी, किश्तवाड़ और क्राइम ब्रांच में ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं।
किश्तवाड़ में एक महिला को भी इस मामले में पकड़ा जा चुका है। गुपचुप तरीके से इस मामले में पूरा धंधा चल रहा है और कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। पहाड़ों और बर्फ पड़ने के स्थानों से यह आसमान से सबसे अधिक गिरता है। उसे लेकर ही कई लोगों ने इस धातु को दिखाकर लोगों को ठगना शुरू किया है। पुलिस के अनुसार ऐसे किसी भी मामले के सामने आते ही वह तुरंत कार्रवाई करते हैं।
ऐसे होती है असली-नकली की पहचान
त्राट गोले को एक विशेष तौर पर बनाए गए बक्से में डालकर बाहर ले जाने की भी आधुनिक तकनीक है। इसकी पहचान सबसे पहले गिलास में चावलों के दाने रखकर की जा रही है। गिलास के बाहर इस धातु को रखा जाता है और गिलास के अंदर रखे चावलों के दाने पाउडर होने लगते हैं। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से इसकी जांच की जाती है।