बता दें कि पिछले एक महीने में करीब आधा दर्जन के करीब खैर चोरी के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अब तक चोरों पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिखी है। यहां तक की हीरानगर के विधायक विजय शर्मा ने विधानसभा में भी लकड़ी तस्करी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। इसके बावजूद सरकार इस पर लगाम लगाने में अब तक असफल साबित हो रही है।
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सुबह जब वह देवस्थान पर माथा टेकने गए तो देखा कि वहां खैर के कई पेड़ कटे हुए थे। इसके बाद संबंधित विभाग को जानकारी भी दी। इस घटना के बाद से लोगों में डर का माहौल बन गया है कि कहीं खैर तस्कर इलाके के बाकी पेड़ों को भी काट कर न ले जाएं। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
पवन, स्थानीय निवासी
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वन विभाग की मिलीभगत से यह काम हो रहा है। अगर गांव के लोग मंदिर में भंडारे के लिए सूखी लकड़ी लेने जंगल भी जाते हैं तो विभाग के कर्मचारी तुरंत पहुंच जाते हैं। मगर तस्कर हरे-भरे पेड़ों को काटकर आसानी से लकड़ी ले जाते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
बादल सिंह, स्थानीय निवासी
कोट
बन में कुल 6 खैर के पेड़ों की कटाई हुई है। इनमें से दो निजी जमीन और चार वन भूमि से कटे हैं। इसकी रिपोर्ट तैयार कर भेज दी गई है और जांच शुरू हो गई है। जिसने भी यह काम किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- मुनीष गुप्ता, रेंज ऑफिसर, वन विभाग