करवाचौथ पर हर तरफ महिलाओं ने सोलह शृंगार कर जब पति की लंबी आयु के लिए पूजा-अर्चना की, तो लगा जैसे चांद भी उनकी सुंदरता देख शर्मा गया हो। महिलाओं के चेहरों की चमक-दमक के सामने चौथी चांद की चांदनी भी फीकी पड़ रही थी।
इसके बावजूद महिलाओं ने समर्पण और श्रद्धा भाव से पहले चंदा मामा का फिर अपने चांद का दीदार कर उसके हाथों पानी पीने के बाद व्रत को खोला। सुहाग के सबसे बड़े त्योहार का जोश और उमंग दिन भर परवान पर रहा।
एक सप्ताह से करवाचौथ की तैयारी के लिए खरीदारी का सिलसिला शुक्रवार को भी दिन भर जारी रहा। बाजारों में रौनक बनी रही। महिलाओं का हुजूम बाजारों में उमड़ा रहा। ज्यादातर भूखी-प्यासी व्रती महिलाएं पूरा दिन सोलह शृंगार करने में निकाला। युवतियों पर भी इस त्योहार का रंग खूब चढ़ा रहा। उन्होंने भी अपने हाथों पर मेहंदी रचाईं।
नवविवाहित जोड़ों के लिए तो जैसे यह दिन और भी खास रहा। गिफ्ट की दुकानों में पतियों का भी जमावड़ा दिखा। देर शाम चांद निकलते ही महिलाओं ने पूजा-अर्चना शुरू की। एक-दूसरे को सरगी भी दीं।
फिर छलनी में दिए को जलाकर पहले चांद को देखा और फिर अपने पति को उस छलनी में से चांद की तरह देखा। उसके बाद पति ने अपने हाथों से पत्नी को पानी पिला कर व्रत को तोड़ा। फिर पत्नी ने पति और सास के पांव छूकर आशीर्वाद लिया।