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Kathua News: राड़े त्योहार से जुड़ी है डोगरी लोक संस्कृति की जीवंत परंपरा

Fri, 25 Jul 2025 01:58 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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हीरानगर सब डिवीजन में हाल में आयोजित राड़े चित्रण कार्यक्रम। स्रोत : जागरूक पाठक​ - फोटो : rajori news
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महिलाएं व युवतियां एकत्रित होकर मिट्टी में परिवार के प्रत्येक सदस्य के नाम पर दबाती हैं विशेष घड़े व बीज
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कठुआ। डोगरी समाज की सांस्कृतिक विरासत को संजोता पर्व राड़े इस वर्ष भी स्थानीय महिलाओं की सहभागिता से हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व में मोहल्लों की महिलाएं व युवतियां एकत्रित होकर मिट्टी में परिवार के प्रत्येक सदस्य के नाम पर विशेष घड़े दबाती हैं।
घड़ों के साथ बीजों को भी रोपित किया जाता है जो आगामी फसल के लिए उर्वरता और समृद्धि की प्रतीकात्मक प्रार्थना माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार पारंपरिक डोगरी व्यंजनों की सामूहिक तैयारी की गई। इसमें खमीरा, कड़ी, सैवईं, मदरा व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं ने व्यंजनों से साझा भोजन की परंपरा को जीवंत रखा जाता है। साथ ही लोक परंपराओं के चित्रण के लिए विशेष प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें युवतियों ने कलात्मक ढंग से राड़े की परंपरा को दर्शाया।
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स्थानीय डोगरी युवा साहित्य क्लब के पूर्व आयोजक जितेंद्र खजूरिया ने बताया कि राड़े नार प्रतियोगिता की शुरुआत साल 1995 में की गई थी। यह प्रतियोगिता लंबे समय तक सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख स्रोत रही। इसके बाद सरकार की ओर से सहयोग न मिलने और घटती जन रुचि के चलते प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हो पाया। फिर भी स्थानीय स्तर पर महिलाओं की ओर से राड़े पर्व की परंपराओं को निभाया जाता है।
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जानकारों का मानना है कि राड़े त्योहार न सिर्फ खेतों की उर्वरता के लिए आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह डोगरी समाज में महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को भी दर्शाता है।
ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसा ही एक आयोजन हाल फिलहाल में हीरानगर के पथवाल में भी आयोजित किया गया।
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