भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर तारबंदी के आगे गेहूं की बुवाई शुरू हो गई है। जिला उपायुक्त राजेश शर्मा ने मंगलवार को बुवाई का शुभारंभ कराया। इस अवसर पर बीएसएफ, कृषि विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
चक चंगा में उपायुक्त ने खुद ट्रैक्टर चलाकर पहली बुवाई की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सीमा के साथ लगती खाली पड़ी जमीन को अधिक से अधिक खेती के दायरे में लाया जा रहा है। किसानों को एकीकृत खेती अपनाने और आधुनिक मशीनरी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि लागत कम हो और उत्पादन बढ़े। उन्होंने बताया कि बीएसएफ और कृषि विभाग के सहयोग से सीमा पार सुरक्षित बुवाई सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी जतिंदर खजूरिया ने बताया कि रबी 2025-26 में सीमा पार 270 एकड़ क्षेत्र में गेहूं बोने का लक्ष्य रखा गया है। पहले दिन ही चक चंगा और छन्न टांडा के 21 किसानों ने 100 एकड़ में बुवाई पूरी कर ली। विभाग की फील्ड टीमें किसानों को तकनीकी सहायता और आधुनिक यंत्र उपलब्ध करा रही हैं।
सीमावर्ती गांवों के किसानों ने कृषि विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से लगातार विभाग का सहयोग मिलने से हर साल अधिक क्षेत्रफल खेती के अंतर्गत आ रहा है। उनके साथ मुख्य एसडीएम फुलैल सिंह , बीएसएफ कठुआ-सांबा रेंज के सीओ एमसी प्रज्ञान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
तारबंदी के आगे बढ़ती खेती से सुधर रही किसानों की माली हालत
वर्ष 2002 में पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी किए जाने के बाद तारबंदी के आगे की जमीन पर खेती बंद हो गई। करीब 20 वर्षों बाद यहां खेती का काम फिर से शुरू हुआ और किसानों ने राहत की सांस ली। जैसे-जैसे यहां खेती का दायरा बढ़ता गया किसानों की आर्थिक व्यवस्था में भी सुधार होने लगा। वहीं यहां खेती करने वाले किसानों की सुरक्षा को लेकर बीएसएफ की भी अहम भूमिका रहती है और इस बार भी बीएसएफ के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया है कि वह बिना किसी डर के अपने खेतों में काम करें, वह उनकी सुरक्षा के लिए हर पल तैयार हैं।