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525 फुट पहुंचा रंजीत सागर झील का जलस्तर

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रंजीत सागर झील का जलस्तर बढ़ने के बाद ‌डूबा पानी। अमर उजाला - फोटो : KATHUA
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कठुआ। रावी दरिया पर बने रंजीत सागर झील का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रंजीत सागर बांध का अधिकतम जलस्तर जहां 531 फुट है, वहीं सोमवार को जलस्तर 525 के आसपास पहुंच गया है। हिमाचल और बनी, बसोहली के इलाकों में लगातार हो रही बारिश से रावी दरिया में पानी का बहाव भी बढ़ता जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रंजीत सागर बांध प्रबंधन ने चारों टरबाइन चला रखे हैं और लगातार बिजली उत्पादन जारी है, ताकि पानी का उपयोग किया जा सके।
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बांध प्रबंधन ने इसी वजह से फिलहाल बांध जलाशय से स्पिल वे गेट्स को भी नहीं खोला है। बांध के निचले इलाकों में लखनपुर और कीड़ियां गंडियाल से होकर पिछले कई दिनों से पानी पाकिस्तान की ओर छोड़ा जा चुका है। ऐसे में रावी दरिया के निचले इलाकों में भी दरिया का जलस्तर बढ़ गया है।
रंजीत सागर बांध प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि हिमाचल के चंबा जिला में हो रही लगातार भारी बारिश के चलते चमेरा बांध प्रबंधन ने बांध के स्पिल वे गेट खोल दिए हैं। ऐेसे में सोमवार को 38 हजार क्यूसेक से भी अधिक पानी का बहाव रंजीत सागर झील में लगातार दर्ज किया जाता रहा है। यदि पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो आने वाले दिनों में रंजीत सागर जलाशय का जलस्तर भी अपने अधिकतम पैमाने पर पहुंच जाएगा, जिससे कई इलाके डूब क्षेत्र में समा जाएंगे।
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झील से सटे हैं कई रिहायशी इलाके
रंजीत सागर बांध के निर्माण का कार्य 1980 के दशक में शुरू हुआ था। वर्ष 2001 में रंजीत सागर बांध की टरबाइन भी कमीशन हो चुकी थीं। इसके बाद वर्ष 2018 में पहली बार झील का रिकार्ड जलस्तर 531 फुट अधिकतम दर्ज हुआ था। कई इलाके जहां पहली बार डूब क्षेत्र में समाए थे, वहीं जम्मू कश्मीर के हिस्सों में विभिन्न विभागों की ओर से बनाए गए ढांचे भी झील के पानी की चपेट में आ गए थे। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बनते जा रहे हैं। बसोहली कसबे के नजदीक शमशान घाट का तालाब भी झील में समा गया है। पुरथू के इलाके में प्रशासन पहले ही नहाने आदि पर प्रतिबंध लगा चुका है। महानपुर से सटे सवार पर खतरा मंडरा रहा है। हैरत की बात है कि प्रशासन की ओर से डूब क्षेत्र का मुआवजा दिए जाने के बाद भी अभी तक इलाकों में लोग डूब क्षेत्र में आई रिहायशी बस्तियों में रह रहे हैं। पीएचई विभाग के बीते साल तीन से चार टयूबवेल झील के पानी मे समा गए थे। पंपिंग स्टेशनों से भी विभाग को एहतियातन मशीनरी उठानी पड़ी थी।
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