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Kathua News: पानी की किल्लत पर गांव गरा के लोगों ने किया प्रदर्शन

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कठुआ/हीरानगर। दशकों से पानी की किल्लत झेल रहे कंडी क्षेत्र के गांव गरा के लोगों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे वोट डालने नहीं जाएंगे।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा पहले भी चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के नेता पानी की समस्या के समाधान के वादे कर चुके हैं लेकिन वादा किसी ने नहीं निभाया। अब उनका भरोसा उठ चुका है।
सोमवार को जम्मू पठानकोट नेशनल हाईवे के निकटवर्ती गरा गांव के लोगों ने बैठक की। इसमें पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही गांव के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सब सही रहे तो महीने में दो बार पानी मिल जाता है लेकिन यदि खराबी आ गई तो पानी के लिए फिर महीनों इंतजार करना पड़ता है।
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रोजमर्रा में मोहल्ले वार पानी का 10 दिन बाद नंबर आता है। ग्रामीणों के पास विकल्प यही है कि गांव में पानी के निजी टैंकर मंगवाए जाएं। उन्होंने बताया कि महीने में एक या दो टैंकर हर परिवार में आसानी से लग जाते हैं। लेकिन उन परिवारों के लिए यह भी नसीब नहीं होता है, जिनकी गलियां संकरी हैं। ऐसे में बर्तनों में ढोकर पानी जमा कर रखा जाता है। स्थानीय निवासी रीता देवी ने कहा कि 25 वर्ष पहले शादी कर इस गांव में आई थीं। जो पानी की समस्या तब थी, वही आज भी है। पूरा दिन नल को देखते गुजर जाता है कि कब इसमें से पानी की बूंद टपकेगी। बेबी शर्मा ने कहा उनके गांव में महीने में दो बार के हिसाब से साल में 24 बार पानी आता है। गांव में कभी कभार पानी का टैंकर आ जाए तो महिलाओं को लगभग 700 से 800 मीटर तक सर पर पानी ढोना पड़ता है।

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ग्रामीणों की दाे टूक प्रत्याशियों के पास सिर्फ वादे, उल्टे पैर लौटाए

इलाकों में चुनाव प्रचार में जुटे प्रत्याशियों को गरा के लोगों का दर्द पता चला तो कुछ ने फोन पर तो कुछ ने मौके पर जाकर लोगों को फिर लुभावने वादे परोसने की कोशिश की लेकिन अब मन बना चुके ग्रामीणों ने लाव लश्कर के साथ आए एक प्रत्याशी को वापस लौटा दिया।

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पानी के चलते लोग पलायन को मजबूर हो चुके हैं

पूर्व सरपंच अश्वनी शर्मा ने कहा गांव में पानी की समस्या इस कदर है कि यहां से लोग पलायन कर रहे हैं। सड़क बिजली की सुविधा तो है लेकिन पानी की सुविधा न होने के कारण युवा पीढ़ी गांव छोड़ रही है। जब हमारे बच्चे ही यहां नहीं रहेंगे तो हम इस गांव को क्या करेंगे। पानी की समस्या के समाधान को लेकर न तो विभाग गंभीर है और न ही जनप्रतिनिधि।
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