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Kathua News: बड़ानाल में पानी पर लगा पहरा, प्रति परिवार 15 लीटर से ज्यादा नहीं मिलेगा

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कठुआ। मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी के बीच कंडी में हालात बद से बदतर हो गए हैं। जिला मुख्यालय कठुआ से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर घाटी पंचायत स्थित बड़ानाल गांव में तो पानी पर पहरा लग गया है। पानी की चोरी को रोकने के लिए बाकायदा चौकीदार की तैनाती कर दी गई है। कुएं का पानी बांटने के बाद चौकीदार उस परिवार का नाम बाकायदा रजिस्टर में दर्ज करता है। प्रति परिवार 15 लीटर पानी ही जारी किया जाता है। यदि कोई पानी की चोरी करता पाया जाए तो उस परिवार को अगले तीन दिन तक कुएं से पानी न देने की सजा सुना दी जाती है।
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विडंबना यह है कि हालात आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बदले हैं। गांव में सात में से छह कुएं सूख चुके हैं। वहीं दो डीप हैंडपंप भी नकारा हो गए हैं। आखिरकार गांव की इस बड़ी आबादी के लिए पेयजल का आखिरी सहारा गांव के एक हिस्से का आखिरी कुआं है। इसमें रात में होने वाले पानी के रिचार्ज के बाद सुबह इसे ग्रामीणों में बांटा जाता है। हर घर नल से जल योजना के दावों की पोल खोलते इस गांव में समृद्ध परिवार पानी की समस्या के चलते पलायन कर चुके हैं लेकिन जिनके पास अपनी जमीनों के अलावा नौकरी तक नहीं, उनके लिए यहीं रहना मजबूरी बन गया है।
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ज्ञान सिंह ने बताया कि दो साल पहले दो लाख 88 हजार की लागत से कुआं खोदा गया था लेकिन पानी उसमें भी नहीं है। इसी तरह से बीते एक दशक में एक एक कर सिर्फ खानापूर्ति के लिए कुएं खोद दिए गए लेकिन जब गांव में पानी की किल्लत आती है तो ये सभी सूख जाते हैं। गांव में दो हैंडपंप भी लगाए गए। इनमें से एक खराब पड़ा है, जबकि दूसरे में एक बाल्टी पानी भरने में एक घंटा से ज्यादा लगता है।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी 50 साल उम्र हो चुकी है लेकिन हालात बदले हुए दिखाई नहीं दिए। परिवारों में आठ से दस लोग हैं। रोजाना खबरों में सुनते हैं कि 12 करोड़ लोगो को नल से जल दिया लेकिन शायद हमारे लिए ऐसी पाइपें ही तैयार नहीं हुईं, जो पानी सप्लाई कर सकें। गुहार लगाते लगाते बुजुर्ग भी चले गए और अब हम भी उज्ज दरिया तक ही जाते हैं आगे जाने की हिम्मत ही नहीं होती है।

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ध्यान सिंह ने बताया कि हमारे पूर्वज पानी को तरसते चले गए और लगता है हम भी ऐसे ही चले जाएंगे। दो साल पहले से डग वेल को लेकर वादे होते रहे। डूंगा कुएं के पास काम डग वेल का लगा है। तीन महीने हो चुके हैं लेकिन कोई राहत नहीं है। दूसरे का काम भी तभी शुरू होगा, जब पहला पूरा होग। गांव में यदि किसी की मौत हो जाए तो नहाने तक के लिए पानी नहीं रहता है।

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मोहिंद्र सिंह ने बताया कि गांव में न तो कोई बेटी देता है और अब तो हालात यह हैं कि शादी के लिए भी लोग राजी नहीं होते। यही कहते हैं कि इस गांव में पानी ही नहीं तो शादी क्या करनी। बच्चे स्कूल रोजाना जाते हैं लेकिन इस भीषण गर्मी में नहाते एक सप्ताह के बाद हैं।

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पहले की खुदाई में तीन महीने गुजरे, पूरा होगा तो दूसरे का शुरू होगा काम

बड़ानाल गांव में पेयजल की आपूर्ति के लिए यहां के लोग नेताओं से लेकर अधिकारियों के यहां चक्कर काट कर थक चुके हैं। चुनाव में वोट डालना ग्रामीणों की मजबूरी है। ग्रामीणों की मानें तो इसके बाद गांव में कोई नहीं आता, जो उनकी समस्या का समाधान करवा सके। हाल फिलहाल में इलाके के लिए दो बोरवेल का काम मंजूर होने की बात सामने आई। गांव से कुछ किलोमीटर पहले जहां सड़क के एक किनारे पर बोरवेल के लिए मशीन खड़ी है लेकिन कछुआ चाल से काम करते तीन महीने बीत चुके हैं। वहीं दूसरे बोरवेल का काम तब हो पाएगा, जब यहां का काम पूरा होगा।

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पशुओं को भी नसीब नहीं गांव में पानी, दिन में एक बार उज्ज दरिया में ले जाते हैं ग्रामीण

बड़ानाल की आबादी के साथ-साथ इन लोगों का इस गांव में रहकर साथ देने वाले पशुओं के लिए भी जिंदगी यहां आसान नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार या तो पशुओं को दिन के समय जंगल की छांव वाले इलाके में बांध आते हैं या फिर उन्हें लेकर दिन में एक बार उज्ज दरिया की ओर चले जाते हैं। इसके बाद इन पशुओं को भी पानी नसीब नहीं होता है।


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बड़ानाल में पेयजल सप्लाई के लिए नेटवर्क नहीं है। फौरी तौर पर हैंडपंप की रिपेयर प्राथमिकता के आधार पर करवाई जा रही है। गांव में जल्द से जल्द राहत के तौर पर टैंकर से पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।
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-गिरधारी लाल गुप्ता कार्यकारी अभियंता, जलशक्ति विभाग, कठुआ

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