शाहपुर कंडी बैराज से पहली बार रावी का पानी उज्ज बैराज और नहर के जरिए सांबा तक पहुंचाया गया, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए बड़ी राहत मिली है। अब इस व्यवस्था से खेतों में सालभर सिंचाई संभव होगी उत्पादन बढ़ेगा और कंडी क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
रावी दरिया का पानी शाहपुर कंडी बैराज से मंगलवार को पहली बार उज्ज बैराज में छोड़ा गया। बैराज में 22 घंटे 20 मिनट में दो फुट पानी जमा हुआ। वहां से सांबा के नानक चक तक जाने वाली उज्ज नहर में प्रवाहित किया गया। अब रावी के पानी से सांबा तक खेतों में भी फसलें लहलहाएंगी और पैदावार बढ़ेगी।
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दशकों पुराना सपना पूरा होने से किसानों को सिंचाई के लिए अब बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। फिलहाल विभाग ने 200 क्यूसेक पानी छोड़ा है जिसे बढ़ाकर 400 से 500 क्यूसेक तक करने की तैयारी है। पहले बसंतपुर व लखनपुर पंपिंग स्टेशन से रावी का पानी लिफ्ट किए जाने से सरकार को हर साल करीब 10 करोड़ खर्च करने पड़ते थे। 2025 की बाढ़ में माधोपुर बैराज के गेट टूट गए। बसंतपुर चैनल भी क्षतिग्रस्त हो गया था। लखनपुर पंपिंग स्टेशन पर मलबा जमा होने से सिंचाई ठप थी।किसानों की मांग पर अब ग्रेविटी से पानी देने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। बीते कुछ माह में जल शक्ति विभाग ने आपातकालीन फंड से 17 से 18 स्थानों पर बहाली कार्य किया है।
इन इलाकों को होगा फायदा
नहर की मरम्मत के बाद अब पानी उज्ज बैराज से होकर राजबाग, चड़वाल, हीरानगर, घगवाल, राजपुरा, सांबा, विजयपुर और रामगढ़ तक पहुंचेगा। इससे गैर-बरसाती मौसम में भी सिंचाई की समस्या का समाधान होगा।
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कंडी में बहेगी विकास की धारा
लंबे समय तक सूखे, वीरान और मौसम के काल चक्र की मार झेल रहे कंडी क्षेत्र की धरती नम होगी। बांध का पानी क्षेत्र की फसलों के लिए वरदान साबित होगा। उत्पादन बढ़ेगा। किसानों को वर्षा का इंतजार नहीं करना होगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसे विकास की नई धारा बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार को शुक्रिया किया है।
हरियाली और समृद्धि की शुरुआत होगी
जसरोटा के विधायक राजीव जसरोटिया ने कहा कि दशकों का सपना साकार हुआ है। कंडी क्षेत्रों में हरियाली और समृद्धि की नई शुरुआत होगी। खरीफ सीजन से पहले किसानों को यह बड़ी सौगात है। आपदा से प्रभावित नहरों का नेटवर्क पूरी तरह से ठीक होने के बाद यह नहरें विकास की धारा बनकर कंडी में बहेंगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के हस्तक्षेप से संभव हुआ है।