रामकोट। रामकोट में अग्निशमन केंद्र न होने के चलते लोग आग लगने की सूरत जान-माल का नुकसान उठाने को मजबूर हैं। बीते समय में आगजनी की कई घटनाएं तहसील के विभिन्न इलाकों में हो चुकी हैं, लेकिन जब तक कठुआ से अग्निशमन दस्ता पहुंचता है, सब स्वाहा हो चुका होता है।
अग्निशमन केंद्र के अभाव में आग पर काबू पाने में लोगों को भारी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। मौजूदा समय में अग्निशमन केंद्र जिला स्तर पर कठुआ में मौजूद है जो इलाके से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है। इससे पहले भी लोग रामकोट तहसील स्तर पर अग्निशमन केंद्र खोलने की मांग उठा चुके हैं, लेकिन सरकार ने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। इलाके में जब भी आगजनी की घटना होती है तो कठुआ से दमकल विभाग को रामकोट तक पहुंचने में लगभग दो घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। इतने समय में लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है। आग लगने की सूरत में तहसील निवासियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।
रामकोट से मुकेश कुमार, सुमेश शर्मा, कुलदीप कुमार और मदन लाल ने बताया कि हर वर्ष इलाके में आगजनी की कई घटनाएं सामने आती हैं लेकिन आग से निपटने का पुख्ता इंतजाम तहसील स्तर पर मौजूद नहीं है। गर्मी के मौसम में हर वर्ष लाखों रुपये की वन संपदा को भीषण आग से क्षति पहुंचती है। रिहायशी इलाकों में भी आग से नुकसान अक्सर देखा जाता है। उन्होंने मांग की कि आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि रामकोट में अग्निशमन केंद्र स्थापित किया जाए।