शहर के भगवती नगर में चल रहे तीन दिवसीय वेद ज्ञान यज्ञ एवं सत्संग कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने वेदों की महिमा और सनातन धर्म की गहराई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक पहलू को दिशा देने वाले दिव्य ज्ञान के स्रोत हैं।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान योगाचार्य ने कहा कि सनातन धर्म अनादि है, जिसका न कोई प्रारंभ है और न अंत। उन्होंने कहा कि वेद और परमात्मा की तरह ही सनातन धर्म भी शाश्वत है।
उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों के कारण लोग धर्म से विमुख हो रहे हैं। सत्य को स्वार्थवश तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। सांसारिक दुखों से मुक्ति का एकमात्र उपाय वेदों के अनुसार जीवन जीना है। अग्नि, वायु और जल जैसे देवताओं के संतुलन के लिए यज्ञ और वेदों के निर्देशों का पालन आवश्यक है। यजुर्वेद में उल्लेख है कि तुमने मेरा यज्ञ त्यागा, इसलिए मैंने तुम्हें दुखों के हवाले कर दिया।
राजनीति और धर्म को एक-दूसरे से अलग मानने की प्रवृत्ति पर उन्होंने कहा कि राजनीति का मूल भी वेदों में है। वेदों में लिखा है कि जो वेद नहीं जानता, उसे मत चुनो। राम, कृष्ण और पांडवों जैसे वेदज्ञ शासकों के काल में जनता सुखी थी।
माया से मुक्ति के लिए उन्होंने वेद मार्ग, हवन, योग और वेदज्ञ आचार्य से मार्गदर्शन को आवश्यक बताया। वेदों के पालन से दीर्घायु, स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने कर्म की स्वतंत्रता दी है, लेकिन फल देने का कार्य उसी का है।