कठुआ। जिले के बिलावर उपमंडल में भारी बारिश के बाद उज्ज दरिया का एक बार फिर रौद्र रूप देखने को मिला। वीरवार दोपहर बारह बजे के बाद दरिया में बाढ़ का सिलसिला शुरू हो गया। लगभग चार घंटे तक उज्ज दरिया एक लाख क्यूसेक के अपने खतरे के निशान से ऊपर बहता रहा। इससे दरिया का रुख निचले इलाकों में छिब्बा चक पंचायत के खंदवाल गांव की ओर मुड़ गया। एक नया दर्रा तैयार होने के बाद दरिया ने रास्ते में आई हर चीज को अपने चपेट में ले लिया। तीन कच्चे मकान भी दरिया के बाढ़ में बह गए। वहीं गांव का श्मशान घाट भी बह गया। बाढ़ की जद में आने से कई मवेशी भी लापता हैं तो वहीं सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि भी बह गई।
देर शाम तक प्रशासनिक टीम के मौके पर न पहुंचने के चलते क्षेत्र के लोगों में भी भारी रोष है। बुधवार रात से जारी बारिश का सिलसिला पहाड़ी इलाकों में वीरवार दिन में रुक रुक कर जारी रहा है। वहीं बिलावर उपमंडल में मूसलाधार बारिश से उज्ज दरिया दोपहर 11 बजे के बाद से उफान पर आने लगा। जसरोटा बांध के गेट जलस्तर बढ़ने पर खोल दिए गए। इसके बाद दरिया का रुख खंदवाल की ओर मुड़ गया। यहां जलस्तर बढ़ने लगा तो तीन कच्चे मकान जद में आ गए। देखते ही देखते फसल और जमीन वाला हिस्सा बाढ़ में बह चुका था। परिवार के सदस्यों ने समय रहते घरों से अपना सामान निकालकर खुले में शरण ली। बाढ़ नियंत्रण अधिकारी एफ आर भगत ने बताया कि उज्ज का अधिकतम जलस्तर एक लाख सात हजार क्यूसेक दर्ज किया गया है। खंदवाल में कुल्ला बहा है और श्मशान घाट को नुकसान पहुंचा है। शेष नुकसान का अंदाजा जलस्तर घटन पर ही लगाया जा सकेगा। उज्ज दरिया का तटबंध बहने के बाद उसने खंदवाल की ओर रुख कर लिया है।
उज्ज की बाढ़ में टापू में फंसे मवेशी। संवाद- फोटो : KATHUA