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Kathua News: अवैध ढंग से शराब बनाने के तीन आरोपी नौ साल बाद बरी

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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अवैध ढंग से शराब बनाने के तीन आरोपियों को नौ साल बाद साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले जब्त उपकरणों को प्रस्तुत नहीं करने को गंभीर चूक बताया है। इसके अलावा अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध करने में असफल रहा है कि आरोपियों के पास शराब निर्माण के उपकरण थे। इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उनको बरी कर दिया।
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मामला तीन जनवरी 2016 का है, जिसमें चार आरोपियों सुरिंदर कुमार पुत्र ज्ञान चंद, अशोक कुमार पुत्र रसाल चंद, लीलो देवी पत्नी रसल चंद और पृथी देवी पत्नी अशोक कुमार सभी निवासी चक द्राब खान को रावी दरिया के किनारे भागथली इलाके में अवैध रूप से भट्ठी लगाकर अवैध ढंग सेे शराब बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मौके पर पुलिस ने 25 लीटर देसी शराब, दो ड्रम लहन, एक चप्पनी, एक पाइप और अन्य उपकरण जब्त किए थे। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर आबकारी अधिनियम की धारा में मामला दर्ज कर चालान को कोर्ट में 24 मार्च 2016 को पेश किया। सभी अभियुक्तों के खिलाफ 20 मई 2016 को आरोप पत्र तय किए गए थे। इसमें उन्होंने निर्दोष होने की दलील दी और मुकदमे की मांग की थी। हालांकि आरोपी सुरिंदर की मुकदमे के दौरान मौत हो गई और उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया था। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने सूचीबद्ध सात गवाहों में से कुल छह गवाहों को पेश किया। कोर्ट ने गवाहों की गवाही के विश्लेषण में पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी जब्त उपकरण जैसे चप्पनी, पाइप, ड्रम आदि अदालत में पेश नहीं किए गए और न ही किसी गवाह को जब्त सामान की पहचान के लिए बुलाया गया। इसके अलावा पुलिस की ओर से कोई स्वतंत्र या राजस्व अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था और न ही अभियोजन पक्ष की ओर से कोई विशेषज्ञ साक्ष्य प्रस्तुत किया गया जो साबित करे कि जब्त उपकरण शराब निर्माण के लिए उपयुक्त थे। इसके बाद अदालत ने विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए जिसमें विशेषज्ञ साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी किया गया था और स्वतंत्र गवाह की उपस्थिति को अनिवार्य माना गया था के आधार पर सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सभी आरोपियों के जमानत बांड और निजी मुचलके रद्द करे के साथ-साथ अपील की अवधि समाप्त होने के बाद मामले में जब्त की गई वस्तुओं को नष्ट करने का आदेश दिया।
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