न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने घर में घुसकर मारपीट करने के पांच साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में असफल रहा। कोर्ट ने पाया कि मामले में चारों गवाहों के बयान विरोधाभासी है और अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया।
पुलिस की ओर से कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार मामला 24 मई 2020 का है। इसमें शिकायतकर्ता करण सिंह ने आरोप लगाया था कि घटना की रात लगभग 12:20 बजे उनके दामाद बलविंदर सिंह, उसके भाई भूपिंदर सिंह और एक अन्य व्यक्ति स्वर्ण सिंह ने उनके घर की दीवार फांदकर जबरन प्रवेश किया और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। इसमें शिकायतकर्ता की पत्नी, बेटी और बेटे को गंभीर चोटें आई थीं। राजबाग थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद 13 अगस्त को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश किया। 17 अगस्त 2021 को कोर्ट में आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। इसमें आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों में से चार गवाहों को पेश किया। शिकायतकर्ता करन सिंह ने अदालत में बताया कि घटना रात के साढ़े 12 बजे हुई थी, जबकि पुलिस को दिए गए बयान में समय नौ बजे लिखा गया। इसके अलावा उनकी बेटी नेहा ने दावा किया कि आरोपियों ने तेजधार हथियार से हमला किया लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इसका कोई भी उल्लेख नहीं था। वहीं शिकायतकर्ता की पत्नी संगीता देवी ने कहा कि आरोपियों ने घर में चाय भी पी। घर में अवैध प्रवेश पर कोर्ट ने सवाल उठाएं और पुलिस अधिकारी वेद प्रकाश ने जांच में कई विरोधाभासों की पुष्टि की और बताया कि घटना का कोई भी स्वतंत्र गवाह नहीं था। इसके अलावा कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी चिकित्सकीय प्रमाण पेश नहीं किया गया और न ही घटनास्थल से कोई जब्त वस्तु को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया।