कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस के 11 साल पुराने मामले में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे आरोपियों का अपराध को साबित नहीं कर सका।
लिहाजा मामले में आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है। इसके अलावा कोर्ट ने मामले में दायर आरोप पत्र को ही खारिज करने के साथ-साथ आरोपियों के जमानतदारों को भी आरोपमुक्त करने का निर्देश दिया है।
पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट के अनुसार मामला 26 जून 2013 का है। इसमें पुलिस ने तीनों आरोपी सुनील सिंह निवासी सांबा, रोशन लाल निवासी दयालाचक और कमल जीत निवासी कूटा को लोंड़ी मोड़ स्थित पुलिस नाके पर जांच के दौरान गिरफ्तार किया था। मौके पर तीनों आरोपी स्कूटर पर सवार थे। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी सुनील सिंह से 350 ग्राम, जबकि रोशन लाल से 5 किलो 500 ग्राम और कमलजीत सिंह से 200 ग्राम भुक्की बरामद की थी। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस की धारा 8, 15 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने 30 अक्टूबर 2013 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप पत्र के समर्थन में कुल 10 गवाहों को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। हालांकि सभी गवाहों ने सकारात्मक रूप से गवाही दी है कि जब आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उस समय आरोपी रोशन लाल ने हाथ में मादक पदार्थ पकड़े हुए था, लेकिन अन्य दो आरोपियों ने मादक पदार्थ को कहां छुपाया था इसकी कोई भी गवाह स्पष्टता से नहीं रख पाया है। इसके बाद आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के अपराध को सिद्ध करने में बुरी तरह विफल रहा है और अभियुक्त इस आधार पर बरी किए जाने के हकदार हैं कि अभियुक्तों की तलाशी संदेह के आधार पर की गई थी। इसके अलावा अभियुक्तों की तलाशी लेने वाले पुलिस अधिकारी के लिए एनडीपीएस की धारा 50 के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य होता है। इससे अभियुक्तों की मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में तलाशी ली जाती है। मगर ऐसा पुलिस ने नहीं किया। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए तीनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया। संवाद