बीमार मवेशियों के इलाज के लिए आठ किलोमीटर दूर डिस्पेंसरियों की लेनी पड़ती है मदद
कठुआ। पंचायत मेहताबपुर और साथ लगते गांव में कोई भी पशु चिकित्सा केंद्र नहीं है। पशुपालकों को मजबूरन बीमार मवेशियों के इलाज के लिए आठ किलोमीटर दूर हटली स्थित पशु चिकित्सा केंद्र या फिर खरोट और गोविंदसर आना पड़ता है। लोग पिछले 20 साल से पंचायत में डिस्पेंसरी की मांग कर रहे है, लेकिन संबंधित विभाग हर बार मांग को अनसुना कर देता है। इस कारण लोगों में रोष है।
लोगों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर सरकार से बैक टू विलेज प्रोग्राम में तीन बार इलाके में पशु डिस्पेंसरी स्थापित करने की मांग की जा चुकी है। मगर हर बार जिला प्रशासन और सरकार के अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन ही मिला है। बिना पशु डिस्पेंसरी के कई बार मवेशी बिना इलाज ही मर जाते हैं। ज्यादातर गांव कंड़ी और पहाड़ी इलाके में आते हैं। संवाद
जब कभी मवेशी बीमार पड़ता है, तो ग्रामीणों के पास पंचायत में इलाज के लिए एक भी चिकित्सा केंद्र नहीं है। लोग बीमार मवेशियों के इलाज के लिए हटली या खरोट डिस्पेंसरी आते हैं। कई बार समय पर इलाज न मिलने पर मवेशियों की मौत हो जाती है।
-दिलावर सिंह, पूर्व सरपंच मेहताबपुर
मेहताबपुर, कलसपुर, गैतरवां, मरौली, बडोली, पटोली, डिलवां, खनैयरा, डोल पशु डिस्पेंसरी न होने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई बार मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में ला चुके हैं। मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों को मवेशियों के इलाज के लिए कई बार निजी पशु चिकित्सक की मदद लेनी पड़ती है।
- मंगल सिंह निवासी मेहतावपुर।
ज्यादातर ग्रामीण भेड़-बकरी पालन और दूध के कारोबार पर ही निर्भर हैं। सरकार को चाहिए की उनके इलाके में भी डिस्पेंसरी की व्यवस्था की जाए।
-करण कुमार, निवासी गैतरवां
पंचायत में पशु डिस्पेंसरी न होने से उनके मवेशी बीमार होने पर बेमौत मर जाते हैं। इससे पशुपालकों को न केवल वित्त नुकसान हो रहा है, बल्कि पशुपालन की ओर लोगों का रुझान भी खत्म हो रहा है।
- मोहिंद्र सिंह, स्थानीय निवासी