रामकोट। धार सड़क पर ट्रॉमा सेंटर नहीं होने के कारण सड़क हादसों में घायल मरीजों की जान पर बन आती है। लगभग 70 किलोमीटर के दायरे में आपात सुविधाएं नहीं के बराबर हैं। स्थानीय अस्पताल में केवल प्राथमिक उपचार उपलब्ध है जिसके बाद मरीजों को जिला अस्पताल कठुआ या फिर जम्मू रेफर किया जाता है।
रामकोट से उधमपुर, दियालाचक और महानपुर तक ट्रॉमा सेंटर की सुविधा नहीं है। ऐसे में आपात स्थिति में मरीजों को करीब 70 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल कठुआ भेजना पड़ता है। यह दूरी तय करने में दो से तीन घंटे का समय लग जाता है जो कई बार गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती है।
तहसील रामकोट, बिलावर और मजालता की करीब एक लाख से अधिक आबादी ट्रॉमा अस्पताल की सुविधा से वंचित है। स्थानीय लोग और जन प्रतिनिधि लंबे समय से इस क्षेत्र में ट्रॉमा अस्पताल खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक यह उम्मीद अधूरी ही बनी हुई है।
हादसों के बाद मरीजों को उप जिला अस्पताल बिलावर रेफर किया जाता है, लेकिन यहां ब्लड बैंक की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे बनी रहती है। वहीं जीएमसी कठुआ और जम्मू तक पहुंचने में लंबा समय लगता है, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।
धार सड़क से रोजाना 10,000 से अधिक वाहन गुजरते हैं। औसतन हर महीने 8 से 10 हादसे होते हैं जिनमें घायल मरीजों को समय पर इलाज न मिलने से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि रामकोट में ट्रॉमा सेंटर की मांग लगातार की जा रही है और इसे क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता माना जा रहा है।