स्थापना के आठ साल बाद भी राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ को नहीं मिली एमआरआई मशीन
औसतन हर रोज एक से दो मरीज भेजे जा रहे जीएमसी जम्मू, बढ़ रहा आर्थिक बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। स्थापना के आठ साल बीतने के बाद भी राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ में एमआरआई सुविधा नहीं है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हर रोज एक से दो मरीज एमआरआई के लिए जीएमसी जम्मू भेजे जा रहे हैं। इससे मरीजों को बेहतर इलाज पाने में देरी हो रही है और उनके ऊपर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
एमआरआई के अभाव में दुर्घटना में घायल ज्यादातर क्रिटिकल मरीजों, ओपीडी और आईपीडी में आने वाले मरीजों को भी जम्मू स्थित सरकारी अस्पताल में रेफर किया जाता है। हालांकि जीएमसी जम्मू में क्रिटिकल मरीजों को यह सुविधा तो जल्द मिल जाती है, लेकिन लिगामेंट इंजरी सहित अन्य मरीजों को लंबी तिथि देकर वापस भेज दिया जाता है। दरअसल, जीएमसी जम्मू ही एकमात्र ऐसा अस्पताल है, जहां जम्मू संभाग में एमआरआई की सुविधा है। ऐसे में मरीजों को जल्द और बेहतर इलाज शुरू करवाने के लिए एकमात्र रास्ता है कि वे एमआरआई किसी निजी क्लीनिक से करवा लें, जो सरकारी अस्पताल से कई गुणा महंगा है। रितिका शर्मा ने बताया कि यूट्रस में सिस्ट होने के चलते स्त्री रोग विशेषज्ञ ने एमआरआई करवाने की सलाह दी। मगर कठुआ में यह सुविधा न होने से जीएमसी जम्मू ने उसे दो महीने की तिथि दी है। रितिका का कहना है कि अगर उसे अपना इलाज जल्द शुरू करवाना है, तो उसे निजी क्लीनिक से एमआरआई करवाना पड़ेगा या फिर लंबा इंतजार करना पड़ेगा। इसके अलावा उसके पास कोई चारा नहीं है। जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज बनाना सरकार का सराहनीय कदम है, ऐसे में अगर जहां एमआरआई की सुविधा होती तो लोगों को जम्मू जाकर धक्के नहीं खाने पड़ते। सरकार को जल्द यह सुविधा यहां उपलब्ध करवानी चाहिए।
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कोट
कॉलेज में एमआरआई की सुविधा को लेकर कई बार सरकार को लिखा जा चुका है। इससे संबंधित डीपीआर तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि जल्द यह सुविधा कॉलेज में उपलब्ध होगी।
-सुरिंद्र अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ।