प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में मन की बात में किया था कठुआ का जिक्र
अब घर के आंगन को खुशियों से भर रही बेटियां
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि लाडलियों का लिंगानुपात पिछले 10 साल में तेजी से बढ़ा है। साल 2014-15 में 862 और 2015-16 में 873 दर्ज किए गए लिंगानुपात के जिले में आंकड़े तेजी से बढ़े हैं।
इस साल ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में लाडलियों की लिंगानुपात दर 936 पहुंच गई है। यह राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से तीन अंक ऊपर दर्ज की गई है। दरअसल साल 2020 में यह आंकड़ा 920 बेटियां प्रति 1000 बेटे दर्ज किया गया था। 2021 में प्रति 1000 लड़कों के मुकाबले बेटियों का लिंगानुपात 914 रहा। बीते साल भी यह आंकड़ा 915 दर्ज किया गया। उधर, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि साफ है सामूहिक प्रयासों से अब जिले के कई आंगन बेटियों की किलकारी से गूंजने लगे हैं। साल 2015 में इसे प्रति 1000 बेटों पर 862 दर्ज किया गया था। इसके बाद देश के पहले 100 जिलों में कठुआ जिले को चुनकर केंद्र सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की थी। जिले में पहले वर्ष में ही सामने आए सुधार के नतीजों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम में सराहना कर चुके हैं, जबकि साल 2016 में दर बढ़कर 873 पहुंच गई थी। इसके बाद व्यापक स्तर पर जिला प्रशासन ने पहल एक कदम नारी सम्मान की ओर चलाते हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को मिशन मोड पर ला दिया।
बदलते दौर के साथ कभी बोझ समझी जाने वाली बेटियां ही अब घर के आंगन को खुशियों से भर रही है। आसमान की ऊंचाईयों की जीतने की बात हो या फिर शिक्षा के क्षेत्र में जिले का डंका बजाने की। हर कदम पर जिले की बेटियां आगे हैं। बेटियों के प्रति सोच बदलते ही सारा परिदृश्य बदल गया।
लिंगानुपात दर
साल
लिंगानुपात
2015
862
2016
873
2022
907
2024
915
2025
936
चलाए जा रहे अभियान
भ्रूण हत्या रोकने को अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कसा शिकंजा
गर्भवती महिलाओं की हो रही मॉनीटरिंग
बालिकाओं को बांटा जा रहा पौष्टिक आहार
बेटियों के शिक्षा के लिए किया जा रहा प्रेरित
कोट
जिले में बेटियों के लिंगानुपात में बेहतरीन नतीजे सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को अन्य विभागों की मदद से गांव-गांव तक पहुंचाया। इससे आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। समाज भी इस बेहतरी के लिए आगे आया है। अब बेटी और बेटों में अंतर को भूलकर लोग बच्चों को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर ध्यान दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी निगरानी रखी और गर्भवती महिलाओं की भी नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।
- डॉ. विजय रैना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कठुआ